राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती मासूम बच्ची की मदद के लिए अस्पताल के डॉक्टर आगे आए हैं। दून अस्पताल में बाल रोग सर्जरी की आईसीयू न होने पर डॉक्टरों ने बच्ची के दिल्ली में इलाज के लिए 36 हजार 500 रुपये इकठ्ठे किए हैं। मासूम छत से गिरने पर गंभीर रूप से घायल हो गई है।
डॉक्टर बने 'भगवान', चंदा कर जुटाई बच्ची के इलाज की फीस
करीब एक सप्ताह पहले पितपुड़ा गांव सहारनपुर निवासी एक व्यक्ति ने अपनी दस साल की बच्ची नजरीन को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया। नजरीन घर की छत से गिरकर घायल हो गई थी। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के गुप्तांग, बच्चेदानी और आंतों में खिंचाव के चलते वह आपस में उलझ गए हैं।
चिकित्साधीक्षक डॉ. केके टम्टा और गैस्ट्रो सर्जन डॉ. विपुल कंडवाल ने विस्तृत जांच के बाद बाल रोग सर्जन से ऑपरेशन कराने का फैसला किया। दून अस्पताल में बाल रोग सर्जरी की आईसीयू उपलब्ध ना होने के चलते उन्होंने परिजनों को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल जाने की सलाह दी।
बच्ची के पिता ने कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उपचार में असमर्थता जताई। इस पर डॉ. केके टम्टा ने सभी चिकित्सकों, फार्मेसिस्टों और सहायक स्टाफ की बैठक बुलाई और मदद की गुहार लगाई। चिकित्सक समेत सभी स्टाफ के सदस्यों ने बच्ची के उपचार के लिए आर्थिक सहायता दी।
डॉ. टम्टा ने बच्ची के पिता को कुल जमा 36,500 रुपये धनराशि सौंप दी। गैस्ट्रो सर्जन डॉ. विपुल कंडवाल ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल में बच्ची के लिए एक बेड आरक्षित करवा दिया गया है। उसकी जांच के बाद तुरंत ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू होगी। नजरीन के पिता मो. शकील ने सभी डॉक्टरों को शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि डॉक्टर उनके लिए भगवान बनकर आए हैं।