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19 जून से फिर बजने लगेगी शहनाई, लेकिन इस महीने भूलकर भी न करें इनकी शादी, अशुभ होता है
Wed, 06 Jun 2018 04:39 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 06 Jun 2018 04:39 PM IST
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पुरुषोत्तम मास में रुक गया विवाहों का सीजन एक बार फिर से शुरू हो जाएगा। पहला मुहूर्त 19 जून को पड़ रहा है। 16 मई से शुरू हुआ पुरुषोत्तम मास 13 जून को समाप्त होगा। शुद्घ ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष में विवाहों के कई मुहूर्त हैं।
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lord vishnu
- फोटो : google
पुरुषोत्तम मास में किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य नहीं होता। पहला विवाह 19 जून को होगा। विवाहों का यह सीजन 22 जुलाई तक चलता रहेगा। 23 जुलाई को देवशयनी एकादशी पड़ेगी, जिसके बाद विवाहों पर 4 महीने का विराम लग जाएगा। ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि ज्येष्ठ मास में बड़े बेटे और बड़ी कन्या का विवाह नहीं होता।
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शादी
ज्योतिष शास्त्र और परंपरा के अनुसार एक गोत्र में विवाह निषेध है। धर्मशास्त्र के प्रमुख ग्रंथ धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु की मान्यता है कि सगे भाई-बहन के विवाह छह महीने के भीतर नहीं करने चाहिए। जो लोग भाई एवं बहन के विवाह एक साथ करते हैं वह सभी शास्त्रों के विरुद्घ है। अलबत्ता यदि एक विवाह के बाद छह महीने के भीतर दूसरा संवत लग जाए तो विवाह संभव है।
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डेमो
- फोटो : डेमो
मान्यता है कि एक ही गोत्र में विवाह होने से संतान में जींस संबंधी दोष रह जाते हैं। इसी प्रकार विवाह के छह महीने बाद तक मुंडन और यज्ञोपवीत आदि संस्कार नहीं करने चाहिए। दो सगी बहनों का विवाह दो सगे भाइयों से करना भी शास्त्र विरुद्घ है। डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार जुड़वा भाई बहनों के विवाह एक ही मंडप में किए जा सकते हैं। बड़े पुत्र के उत्पन्न होने के बाद छह महीने तक कोई विवाह नहीं करना चाहिए।
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marriage
इसी प्रकार शास्त्र कहता है कि घर में मृत्यु होने पर एक वर्ष विवाह नहीं होता। विवाह के अलावा कोई शुभ कार्य भी नहीं होता। कन्या का विवाह सम तिथियों में और पुत्र का विवाह विषय तिथियों में शुभ माना गया है। इसके विपरीत विवाह करने से दांपत्य जीवन में कुछ कठिनाइयां आती हैं।
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