अक्सर आपने सुना होगा कि आपदा में कोई अपनों से बिछड़ गया, लेकिन यहां आपदा ही बिहार के एक लड़के के लिए उसके घरवालों से मिलने की वजह बन गई। जी हां, एसडीआरएफ के एक जवान की सजगता से ये युवक आज अपने घरवालों से मिल सकेगा।
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शिवाजनऔर जवान कुलदीप सिंह
- फोटो : एसडीआरएफ फेसबुक पेज
हाल ही में उत्तरकाशी में आई आपदा के बाद आराकोट के किरानू गांव में राहत-बचाव कार्य चलाया गया। एसडीआरएफ के एक जवान कुलदीप सिंह को उस दौरान एक युवक ने देखा। जवान को सब लोग अपनी समस्या बता रहे थे। इसी बीच एक 22 साल का युवक शिवाजन भी जवान के पास पहुंचा।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
शिवाजन की आंखों में आंसू थे। उसे जवान को देखकर एक उम्मीद नजर आई कि वह अपने घर वापस जा सकता है। लेकिन कहां ये उसे पता नहीं था। जवान ने जब उससे बात की तो पता लगा कि वह 13 साल पहले बिहार से कुछ मजदूरों के साथ उत्तरकाशी काम के लिए आया था। वह सेब की पैकिंग का काम करता था।
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जवान कुलदीप सिंह
- फोटो : एसडीआरएफ फेसबुक पेज
एक दिन मजदूरों का मालिक से झगड़ा हो गया और नौ साल के बच्चे को छोड़कर वे लोग रात को ही गांव से चले गए। इसके बाद वह वहीं पर किसी तरह से गुजर बसर कर रहा है। युवक को अब अपने गांव, पिता का नाम कुछ भी याद नही है। जवान ने जब बात की तो पता लगा कि वह बिहार का रहने वाला है। उसने बताया कि उसके घर के पास बड़े-बड़े हवाई जहाज उड़ते थे। जवान ने शिवाजन को उसके घरवालों से मिलाने की ठान ली और उनकी मेहनत रंग भी लाई।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
उन्होंने इंटरनेट की मदद से उसके गांव का पता लगाया। बिहार में पुलिस से संपर्क कर उसके गांव का पता दिया तो परिवार की सारी जानकारी मिल गई। एसडीआरएफ ने शिवाजन की माता फूलादेवी पत्नी स्व. कृष्णा मांझी को उनके बेटे से मिलने और वापस ले जाने के लिए देहरादून बुलाया है। वह अपने बेटे रोहित के साथ देहरादून के लिए निकल चुकी हैं। वहीं एसडीआरएफ ने जवान को उनकी जागरुकता के लिए 2500 रुपये के नगद इनाम देने की घोषणा की है। यह जानकारी एसडीआरएफ ने अपने फेसबुक पेज पर भी शेयर की है।