देवभूमि का ऐसा मंदिर, जहां दिन में तीन बार रूप बदलती हैं देवी मां!
उत्तराखंड में बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा मार्ग के मुख्य पड़ाव से 15 किमी की दूरी पर स्थित चमत्कारिक इस मंदिर में देवी मां दिन में तीन बार रूप बदलती हैं। देवी मां देवभूमि उत्तराखंड की रक्षक के रूप में जानी जाती हैं। अलकनंदा नदी के तट पर स्थित सिद्धपीठ मां धारी देवी के मंदिर में रोजाना यह चमत्कार होता है। तस्वीरों में देखें...
देवभूमि का ऐसा मंदिर, जहां दिन में तीन बार रूप बदलती हैं देवी मां!
कहते हैं यहीं मां काली की कृपा से महाकवि कालिदास को ज्ञान मिला था। शक्ति पीठों में कालीमठ का वर्णन पुराणों में मिलता है। मान्यता है कि कालीमठ मंदिर से ही मूर्ति का सिर वाला भाग बाढ़ से अलकनंदा नदी में बहकर धारी गांव नामक स्थान पर आ गया। गांव की धुनार जाति व स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर सिर वाले भाग को समीपवर्ती ऊंची चट्टान पर स्थापित किया।
देवभूमि का ऐसा मंदिर, जहां दिन में तीन बार रूप बदलती हैं देवी मां!
धारी गांव के पांडे ब्राहमण मंदिर के पुजारी हैं। मां काली कल्याणी की यह मूर्ति वर्तमान में अलकनंदा नदी पर जल-विद्युत परियोजना के निर्माण के चलते नदी से ऊपर मंदिर बनाकर स्थापित की गई है।
देवभूमि का ऐसा मंदिर, जहां दिन में तीन बार रूप बदलती हैं देवी मां!
जनश्रुति है कि यहां मां काली प्रतिदिन तीन रूप बदलती है। वह प्रात:काल कन्या, दोपहर में युवती व शाम को वृद्धा का रूप धारण करती हैं। प्रतिवर्ष चैत्र व शारदीय नवरात्र में हजारों श्रद्धालु अपनी मनौतियों के लिए मंदिर में आते हैं। इसके अलावा चारधाम यात्रा के दौरान भी हर रोज सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
देवभूमि का ऐसा मंदिर, जहां दिन में तीन बार रूप बदलती हैं देवी मां!
उत्तराखंड के लोग इस पहाड़ों वाली मां को बहुत मानते हैं। लोगों का आरोप है कि उत्तराखंड सरकार ने उनकी एक नहीं सुनी और देवी माता के मंदिर को तोड़ दिया। पहाड़ी बुजुर्गों के अनुसार उत्तराखंड में समय-समय पर आने वाली विपदा का कारण मंदिर को तोड़कर मूर्ति को हटाया जाना ही है। ये प्रत्यक्ष रूप से देवी का प्रकोप है।