उत्सव का त्योहार दिवाली की उमंग सोमवार धनतेरस के साथ शुरू होकर भैया दूज तक रहेगी। इस बीच छोटी दीपावली (नरक चतुर्दशी), बड़ी दिवाली, गोवर्धन पूजा आदि पर्व उल्लास के साथ मनाए जाएंगे। मान्यता है कि पांच दिनों तक घर में अखंड दीपक प्रज्ज्वलित करने से पांच तत्व अग्नि, वायु, जल, आकाश और पृथ्वी संतुलित हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि भगवान धन्वंतरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परंपरा है। लोक मान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन वस्तु खरीदने से उसमें तेरह गुना वृद्धि होती है। इस दौरान घरों में पूजा पाठ और तमाम तरह के पकवान बनाए जाते हैं।
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diwali
- फोटो : amar ujala
बड़ी दिवाली के दिन माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए विशेष पूजा की जाती है। इसके पहले लोग घरों को सजाने के साथ ही दीयों से रोशनी करते हैं। डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार इन तीन श़ुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से विशेष लाभ होगा।
धनतेरस के दिन त्रयोदशी में स्थिर लग्न सुबह 7:07 से 9:15 बजे तक रहेगा। दोपहर में 1:00 से 2:30 बजे तक रहेगा। रात में 5:35 बजे से 7:30 बजे तक रहेगा। इस मुहूर्त में की गई खरीदारी शुभ और फलदायक होगी। धनतेरस के दिन लक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त प्रदोष काल एवं वृष लग्न शाम 5:35 से 7:30 बजे तक रहेगा।
इसी दिन शुक्र तुला राशि में स्वगृही होकर मालव्य योग के साथ विद्यमान है और मंगल अपनी उच्च राशि मकर में विद्यमान रहेंगे। देवगुरु बृहस्पति मंगल की राशि वृश्चिक में विद्यमान होंगे जो पूर्ण शुभ फलदायक होंगे और व्यापारिक वृद्धि एवं चमक दमक में वृद्धि होगी।