महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ज्ञानकुंभ के उद्घाटन समारोह में अपने 16 मिनट के संबोधन के दौरान शिक्षकों का आह्वान किया कि वह बच्चों में छिपी प्रतिभाएं पहचानकर उन्हें विकसित करें।
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ज्ञानकुंभ में राष्ट्रपति ने चाणक्य और आंबेडकर की दी मिसाल, तस्वीरों में देखें कार्यक्रम की झलकियां
राजेश शर्मा , अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sat, 03 Nov 2018 11:55 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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महामहिम राष्ट्रपति का संबोधन बेहद सधा हुआ रहा। ठीक 11 बजकर 16 मिनट पर उन्होंने संबोधन शुरू किया और 11 बजकर 32 मिनट पर संबोधन समाप्त किया।
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उन्होंने कहा कि हर बच्चे के अंदर कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है। उसे संवारने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर है।
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उन्होंने चाणक्य का उदाहरण देते हुए कहा कि तक्षशिला विश्वविद्यालय में पढ़े चाणक्य अपनी प्रतिभा के बल पर उसी विश्वविद्यालय के कुलपति भी बने।
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उन्होंने विक्रमादित्य के अंदर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उन्हें इस तरह विकसित किया कि विक्रमादित्य दुनिया के सबसे ताकतवर सम्राटों में गिने जाते हैं।