पहाड़ों की रानी मसूरी में कूड़े की समस्या गंभीर होती जा रही है। वेस्ट कलेक्शन सेंटर कूड़े से भर गए हैं, जिससे अब सड़कों पर कूड़ा डाला जा रहा है। कूड़े से उठ रही दुर्गंध के कारण लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है।
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दरअसल, शीशमबाड़ा स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में मसूरी का कूड़ा डालने पर पिछली दो अगस्त से रोक लगी हुई है। जिससे शहर से प्रतिदिन निकलने वाले 15 टनकूड़े को आईडीएच बिल्डिंग के पास वेस्ट कलेक्शन सेंटर में ही जमा किया जा रहा है।
अब यहां कूड़े का पहाड़ खड़ा हो गया है। जिससे सड़क पर कूड़ा फैल रहा है। इस सेंटर से मात्र 10 मीटर की दूरी पर आवासीय भवन हैं, जिनमें कई परिवार निवास करते हैं।
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मसूरी में बिखरा कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
कूड़े से उठने वाली दुर्गंध के कारण इन परिवारों का यहां रहना मुश्किल हो गया है। साथ ही संक्रामक बीमारियों के फैलने का भी खतरा बना हुआ है। मसूरी नगर पालिका ने शासन से छह माह के लिए शीशमबाड़ा में कूड़ा डालने की अनुमति के लिए पत्राचार किया था।
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मसूरी में बिखरा कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
पत्राचार के बाद भी इस पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने शुक्रवार को वेस्ट कलेक्शन सेंटर का निरीक्षण किया और अधिकारियों से इस कूड़े के निस्तारण पर चर्चा की।
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मसूरी में बिखरा कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
पालिकाध्यक्ष अनुज गुप्ता ने कहा कि शहर में कूड़ा निस्तारण की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। वेस्ट कलेक्शन सेंटर के अंदर और बाहर करीब 360 टन से अधिक कूड़ा एकत्र हो गया है। उन्होंने बताया कि कूड़ा निस्तारण के लिए बायोमिथेन प्लांट के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
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मसूरी में बिखरा कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
प्लांट का कार्य तीन दिन में शुरू हो जाएगा। प्लांट के निर्माण में करीब चार माह का समय लग सकता है। इन चार माह तक मसूरी में जो कूड़ा एकत्र होगा उसे शीशमबाड़ा स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट में भेजने के लिए मुख्य सचिव को पत्र भेजकर अनुमति मांगी है।