तस्वीरों में देखिए, कैसे बहुओं ने अपनी करनी से उजाड़ दिया परिवार
देहरादून के प्रेमनगर में श्यामपुर के जोशी परिवार में घर की लक्ष्मी मानकर दो बहुएं लाई गईं। बड़ी बहू प्रेमी के चक्कर में परिवार की इज्जत दांव पर लगा गई, जबकि छोटी बहू परिवार को उजाड़ने का कारण बन गई। तीसरी बहू लाने गए परिवार के लिए यात्रा ही अंतिम यात्रा साबित हुई।
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जोशी परिवार की मुखिया रही कमला जोशी ने जीवित रहते सपने में भी नहीं सोचा होगा कि बहुएं ही परिवार की बर्बादी का कारण बन जाएंगी। बड़े बेटे राजेंद्र जोशी की शादी कर दीपा को बहू बनाकर लाई थीं। बहू ने भास्कर के रूप में चिराग दिया तो परिवार की खुशियां बढ़ गईं। लेकिन मासूम भास्कर जब छह माह का रहा होगा, तब दीपा ने परिवार से मुंह मोड़ लिया।
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दीपा जोशी साल 2009 में प्रेम-प्रसंग में फंसकर किरायेदार के साथ घर की दहलीज पार कर गई। कुछ दिन बाद दीपा मिली तो परिजनों ने उसे स्वीकार नहीं किया। बाद में दीपा को उसके परिजन नारी निकेतन से अपने साथ ले गए। जोशी परिवार को खोई इज्जत संभालने में कई बरस लग गए। कमला उसे बुरा सपना मानकर दूसरे बेटे दीपक जोशी (फौजी) की पत्नी के रूप में चंचल जोशी को घर लेकर आईं।
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पति के ड्यूटी पर होने की वजह से चंचल जोशी की निगाह कब पड़ोसी संजय पंत से मिल गई, घरवालों को पता भी नहीं चला। बाद में शक हुआ तो चंचल को मायके भेज दिया। करीब छह माह पहले दीपक अपनी पत्नी को लेकर उड़ीसा चला गया। इसी बीच कमला जोशी ने राजेंद्र की पत्नी के रूप में तीसरी बहू लाने का सपना संजो लिया।
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वह 27 नवंबर को उसे साकार करने के लिए बेटे राजेंद्र और पोते भास्कर को लेकर पिथौरागढ़ के लिए रवाना हुईं। उन्हें तनिक भी एहसास नहीं था कि जिस कार चालक संजय पंत को वह अपनी जिंदगी की कमान दे रही हैं, वही उनकी जान का दुश्मन बन जाएगा। संजय पंत योजनाबद्ध तरीके से एक-एक सदस्य की जिंदगी लील गया।