क्रिकेटर उन्मुक्त चंद ने टीम इंडिया में शामिल होने के लिए अभी तक आस नहीं छोड़ी है। उन्हें अभी भी भरोसा है कि वह जल्द टीम इंडिया का हिस्सा बनेंगे और देश के लिए कुछ अच्छा करेंगे।
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क्रिकेटर उन्मुक्त चंद
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2000 में मोहम्मद कैफ और वर्ष 2008 में विराट कोहली के बाद 2012 में उन्मुक्त चंद तीसरा ऐसा नाम था, जिनकी कप्तानी में भारत ने अंडर-19 विश्वकप जीता था। उन्मुक्त ने सभी को अपनी कप्तानी और बल्लेबाजी से प्रभावित किया था। उन्मुक्त का इंडियन क्रिकेट लीग के 6 सीजन में मुंबई, दिल्ली और राजस्थान जैसी बड़ी टीमों में खेलने का मौका मिला, लेकिन वे कुछ खास नहीं करे सके।
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क्रिकेटर उन्मुक्त चंद
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खराब फॉर्म के कारण अगली बार उन्हें किसी फ्रेंचाइजी ने नहीं खरीदा। अमर उजाला से बातचीत में उन्मुक्त चंद ने बताया कि उतार-चढ़ाव हर किसी के साथ आता है, लेकिन इस वक्त से वह सीख रहे हैं। अपने क्रिकेट को पहले से बेहतर कर रहे हैं।
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क्रिकेटर उन्मुक्त चंद
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उन्होंने बताया कि समय के साथ परिपक्वता बढ़ती है, जो कि सुधार के लिए आवश्यक भी है। कहा कि भारतीय टीम के सभी खिलाड़ियों से उन्होंने कुछ न कुछ सीखा है। उन्होंने कहा कि 28 से 34 वर्ष की आयु का समय क्रिकेट के क्षेत्र में उभरने का काफी अच्छा समय होता है। शिखर धवन जैसे खिलाड़ियों को काफी समय बाद टीम में खेलने का मौका मिला है।
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सोमवार को उन्होंने पूरा दिन देव संस्कृति विश्वविद्यालय में बिताया। यहां उन्होंने योग और यज्ञ किया। छात्रों के साथ क्रिकेट भी खेला। उन्मुक्त चंद रविवार की रात देव संस्कृति विवि पहुंचे। सोमवार की सुबह सबसे पहले उन्होंने विवि में ही योग करने के बाद यज्ञ किया। इसके बाद वह विवि के प्रतिकुलपति डा. चिन्मय पंड्या से मिले।