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उत्तराखंड में फिर शुरू हआ 'चिपको आंदोलन', तस्वीरों में देखें...

Sun, 21 Feb 2016 03:54 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 21 Feb 2016 03:54 PM IST
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उत्तराखंड में फिर शुरू हआ 'चिपको आंदोलन', तस्वीरों में देखें...

Chipko movement start again in uttarakhand.

टिहरी के घनसाली में थाती कठूड पट्टी के भेटी गांव की महिलाओं ने एक बार फिर से 'चिपको आंदोलन की' याद ताजा कर दी है। नहर निर्माण के नाम पर जब शनिवार को सिंचाई और वन निगम ने बांज की पेड़ों को काटने के लिए आरियां चलाई, तो महिलाएं पेड़ पर चिपक गई।

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Chipko movement start again in uttarakhand.

महिलाओं ने कहा कि बांज के इन पेड़ों को उन्होंने वर्षों तक अपने बच्चों की तरह पाला है। अब पेड़ों की बलि को वे अपने सामने नहीं देख सकते हैं। महिलाओं के विरोध को देखते हुए वन निगम और सिंचाई विभाग के कर्मियों को बैरंग लौटना पड़ा। पेड़ों की सुरक्षा के लिए 1976 में जोशीमठ विकास खंड के रैणी गांव की गौरा देवी के नेतृत्व में चिपको आंदोलन चला था। उस वक्त भी महिलाओं के विरोध के आगे वन विभाग को झुकना पड़ा था। शनिवार को भेंटी गांव में चिपको आंदोलन जैसा दृश्य देखने को मिला।

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Chipko movement start again in uttarakhand.

सिंचाई विभाग ने बासर नहर से पौनी बासर के लिए चार किमी नहर निर्माण करना है। नहर निर्माण के लिए एक करोड़ 23 लाख की धनराशि स्वीकृत है। शनिवार को वन निगम और सिंचाई विभाग के कर्मी भेटी गांव के रे नामे तोक में बांज के पेड़ काटने पहुंचे। जैसे पांच पेड़ कटे महिलाओं को भनक लगी। बड़ी संख्या में महिलाएं वहां पहुंच गई और पेड़ों पर चिपक गई।

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उत्तराखंड में फिर शुरू हआ 'चिपको आंदोलन', तस्वीरों में देखें...

Chipko movement start again in uttarakhand.

महिलाओं ने कहा कि नहर निर्माण की उन्हें पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी। वर्षो तक उन्होंने इन पेड़ों को बच्चों की तरह पाला है। एकाएक वह पेड़ों की इस तरह बलि चढ़ते हुए देख नहीं सकते हैं। सिंचाई विभाग के कर्मियों ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन महिलाएं पेड़ों पर चिपकी रही। महिलाओं के आक्रोश को देखते हुए वन निगम और सिंचाई विभाग के कर्मियों को लौटना पड़ा।

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Chipko movement start again in uttarakhand.

प्रधान राम लाल शाह ने कहा कि नहर निर्माण के नाम पर पेड़ों को काटने की सिंचाई विभाग की ओर से कोई जानकारी पहले नहीं दी गई। पेड़ों पर मीना देवी, हंसा देवी, सुनीता देवी, सुनीता देवी, जलमा देवी, केदारी देवी, दर्शनी देवी आदि महिलाएं चिपकी रही। सिंचाई विभाग घनसाली के सहायक अभियंता सचिन शर्मा का कहना है कि बासर नहर निर्माण के लिए पेड़ों की कटान की स्वीकृति 24 नवंबर 2015 को केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मिली थी। पेड़ों के कटान के लिए 11 लाख रुपये वन विभाग में सिंचाई विभाग ने जमा किया है। पूर्व में गांव के लोगों को पेड़ काटने की सूचना दी गई थी। तब किसी ने आपत्ति दर्ज नहीं की।

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