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घृत कंबली में छह माह तक कंबल में विराजमान रहते हैं भगवान बदरीश

Sun, 17 Nov 2019 04:49 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal प्रदीप भंडारी, अमर उजाला, बदरीनाथ
प्रदीप भंडारी, अमर उजाला, बदरीनाथ Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 17 Nov 2019 04:49 PM IST
सार

  • महाप्रसाद के रूप में बंटता है कंबल 

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char dham yatra 2019 Lord Badrinath stays in a blanket Ghrit Kambli for six months
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दौरान भगवान बदरीविशाल को विशेष घृत कंबल से लपेटा जाएगा। सदियों पुरानी इस परंपरा के अनुसार माणा गांव की कन्याएं और सुहागिन इस घृत कंबल को तैयार करती हैं। 


 

char dham yatra 2019 Lord Badrinath stays in a blanket Ghrit Kambli for six months

पौराणिक परंपरा के अनुसार कार्तिक माह में शुभ दिन पर इस कंबल को माणा गांव की महिलाएं और कन्याएं ऊन कातकर एक ही दिन में तैयार करती हैं। इसे बनाने वाली कन्याएं और महिलाएं इस दिन उपवास रखती हैं।
 

char dham yatra 2019 Lord Badrinath stays in a blanket Ghrit Kambli for six months
badrinath - फोटो : badrinath

माणा गांव के पीतांबर मौल्फा कहते हैं कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ पूरा किया जाता है। कार्तिक माह में ही किसी शुभ दिन पर इस कंबल को बदरी-केदार मंदिर समिति को सौंप दिया जाता है।
 

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कपाट बंद होने के दिन मंदिर के मुख्य पुजारी रावल इस कंबल पर गाय के घी और केसर का लेप लगाकर इससे भगवान बदरीनाथ को ढक देते हैं।

 
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इस कंबल का विशेष महत्व होता है। ग्रीष्मकाल में जब भगवान बदरीनाथ के कपाट खुलते हैं तो उस समय यह कंबल महाप्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।
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