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Chandra Grahan In Uttarakhand: ग्रहण के बाद खुले मंदिरों के कपाट, लोगों ने गंगा स्नान के बाद की पूजा अर्चना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: अलका त्यागी
Updated Tue, 08 Nov 2022 08:18 PM IST
सार
आज लगने वाला ग्रहण भरणी नक्षत्र और मेष राशि के चंद्रमा में घटित होगा। कार्तिक मास में चंद्र ग्रहण होने से शुभता रहती हैं। अन्य औषधि फल आदि के उत्पादन में वृद्धि के योग होते हैं। भरणी नक्षत्र में चंद्रग्रहण होने से वस्त्रों के भाव में तेजी व्यापारियों को लाभ होता है।
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ग्रहण खत्म होने के बाद खुले मंदिरों के कपाट
- फोटो : अमर उजाला
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आज मंगलवार को कार्तिक पूर्णमा के मौके पर साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगा। सुबह से ही ग्रहण का सूतक लगने के कारण सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। ग्रहण के बाद मोक्षकाल में शाम को मंदिर खुलने के बाद श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद पूजा अर्चना की।
यह ग्रहण भारत के सभी भागों में दिखाई दिया। भारतीय समय के अनुसार वैसे तो चंद्रग्रहण दोपहर 2:40 से 6:20 के मध्य दिखाई दिया, लेकिन उत्तराखंड में यह शाम 5:32 से शुरू हुआ।
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चंद्र ग्रहण
- फोटो : पेक्सेल्स
इस साल के अंतिम चंद्रग्रहण के चलते मंगलवार को बदरीनाथ धाम सहित सभी मंदिर बंद रहे। यमुनोत्री-गंगोत्री और केदारनाथ के शीतकालीन मंदिर बंद रहे। इससे पहले मंदिर में अभिषेक, पूजा-अर्चना, बाल भोग लगाया गया। शाम को ग्रहण का सूतक खत्म होने के बाद मंदिरों के शुद्धीकरण के बाद पूजा-अर्चना की गई।
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बदरीनाथ
- फोटो : अमर उजाला
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने बताया कि पंचांग गणना के अनुसार चंद्रग्रहण मंगलवार शाम पांच बजकर 32 मिनट पर शुरू हुआ और शाम छह बजकर 18 मिनट तक रहा। सूतक काल के चलते बदरीनाथ मंदिर सुबह आठ बजकर 15 मिनट पर बंद किया गया। इससे पहले मंदिर में अभिषेक, पूजा-अर्चना, बाल भोग लगाया गया।
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कमलेश्वर मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
देहरादून में भी टपकेश्वर मंदिर, पृथ्वीनाथ मंदिर व ऋषिकेश में लक्ष्मणझूला, मुनिकीरेती और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में संचालित एतिहासिक मठ मंदिरों के कपाट चंद्रग्रहण से पहले बंद कर दिए गए थे। ग्रहण समाप्त होने के बाद ही मंदिरों के कपाट खुले।
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कार्तिक पूर्णिमा पर हरिद्वार में गंगा स्नान
- फोटो : अमर उजाला
नैनीताल में मां नयना देवी मंदिर के कपाट भी सुबह बंद कर दिए गए थे। उधर, कार्तिक पूर्णिमा पर मंगलवार को हरिद्वार में करीब 57 मिनट का चंद्र ग्रहण रहा। चंद्र ग्रहण का साया हटने के बाद मंदिरों में पूजा-अर्चना हुई। देवी-देवताओं के स्नान के बाद संध्या आरती हुई।
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