शिक्षितों और वैज्ञानिक सोच वालों का नगर माना जाने वाला देहरादून दीपावली आने की आहट के साथ ही अंधविश्वास व दकियानूसी सोच की गिरफ्त में जकड़ जाता है। दून की कई दुकानों पर इन दिनों भूत-प्रेत, पिशाच, चुड़ैल, डायन की कथित साधना में इस्तेमाल होने वाला सामान हाथों-हाथ बिक रहा है।
दिवाली पर इस शहर में आती है 'भूतों की फौज', शर्मनाक लेकिन है सच
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दीपावली की रहस्यमयी कही जाने वाली अमावस्या की रात सब कुछ बदल देने का झांसा देकर तमाम, तांत्रिक, ओझा, बाबा, अघोरी, लोगों को तमाम उल-जुलूल सामानों की फेहरिस्त थमा रहे हैं। सामानों के नाम ऐसे-ऐसे कि सुनकर माथा घूम जाए।
अमर उजाला संवाददाता गौरव मिश्रा ने इन दुकानों की पड़ताल की तो सामने आया कि इन दिनों जिन्नदाना, भूतदाना, मशानदाना, पंचरत्न, गोलोचन, भूत केसी, अष्ट गंध, सात कुओं का जल, 27 चौक के कंकड़ की जबरदस्त मांग है। हनुमान चौक स्थित पूजा सामग्री के थोक विक्रेता राकेश देवल कहते हैं कि इन सामानों के लिए रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक आ रहे हैं।
ग्राहकों में उच्च वर्ग व बेहद शिक्षित लोगों की संख्या बढ़ रही है। विक्रेता देवेंद्र कुमार और महेश प्रसाद ने बताया कि इस समय मांग इतनी अधिक बढ़ गई है कि माल कई गुना मंगाना पड़ रहा है। यह सामान बंगाल, असम, कर्नाटक, कश्मीर, उड़ीसा से आता है।
जादू-टोने-तंत्र का सामान
भूतदाना
प्रेतदाना
चुड़ैलदाना
पिशाचदाना
भूतकेश
गूगल
चुड़ैल केशी
कामिया सिंदूर
अष्टगंध
सात नदियों का पानी
मोर पंखी
काले भूत का इत्र
27 चौराहों के कंकड़
नौ कुओं का पानी
नौ तरह की लकड़ी
-शिक्षाविद् व वैज्ञानिक सोच आंदोलन के प्रणेता डॉ. एसके कुलश्रेष्ठ