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कई लोगों का जीवन बचाया लेकिल खुद को नहीं बचा सके प्रकाश पंत, सैकड़ों लोग हुए बेसहारा

Mon, 10 Jun 2019 08:27 AM IST
अलका त्यागी कालिका रावल, अमर उजाला, पिथौरागढ़
कालिका रावल, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 10 Jun 2019 08:27 AM IST
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Bjp Minister Prakash pant funeral he save many people life 

उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री प्रकाश पंत एक मिलनसार, सरल इंसान और बेहतर राजनेता ही थे। उन्होंने कई लोगों की जिंदगी बचाने में अहम भूमि निभाई। यह विडंबना ही कही जाएगी कि वह स्वयं की जान नहीं बचा पाए। शनिवार को श्रद्धांजलि सभा में तमाम ऐसे लोग मिले, जिनकी जिंदगी की गाड़ी पंत की पहल से आगे चल रही है।

Bjp Minister Prakash pant funeral he save many people life 
prakash pant - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड के प्रखर और प्रमुख राजनेताओं में शुमार कैबिनेट मंत्री स्व. पंत फार्मेसी की दुकान चलाने के दौर से ही गरीबों, असहाय लोगों की मदद करते थे। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर जनता के अंतिम दर्शनों के लिए देवसिंह मैदान में रखा हुआ था। वहां पर कई लोग ऐसे मिले, जिनकी जिंदगी बचाने में पंत का अहम योगदान रहा है। शहर के कुमौड़ निवासी प्रदीप महर (पैरी) बताते हैं कि 2011 में वह पहाड़ी से गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो गए थे। 

Bjp Minister Prakash pant funeral he save many people life 
prakash pant - फोटो : अमर उजाला

कमर समेत शरीर के तमाम हिस्सों में गंभीर चोट थी। उन्हें तत्काल हायर सेंटर पहुंचाया जाना आवश्यक था। परिवारजनों ने तत्कालीन मंत्री प्रकाश पंत से मदद की गुहार लगाई। पंत ने हेलीकॉप्टर भेजकर उन्हें देहरादून पहुंचाया। देहरादून के अस्पताल में इलाज कराने में भी मदद की, उनकी बदौलत ही आज वह स्वस्थ हैं।

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Bjp Minister Prakash pant funeral he save many people life 
prakash pant - फोटो : अमर उजाला

पुलिस लाइन में दुकान चलाने वाले बसंत बल्लभ जोशी (बसदा) जो कांग्रेस से जुड़े हुए हैं, बताते हैं कि कुछ साल पहले वह गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इलाज कराने में कैबिनेट मंत्री पंत ने बहुत सहयोग किया। उनका एहसान ताजिंदगी उन पर रहेगा। 

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prakash pant - फोटो : अमर उजाला

प्रदीप, बसंत ही नहीं पिथौरागढ़ में ऐसे सैकड़ों लोग और परिवार हैं, जिनको प्रकाश पंत ने व्यक्तिगत रूप से मदद दी। लोगों के सुख-दुख के साथी प्रकाश पंत के अचानक ही अपने बीच से चले जाने से लोग बेहद दुखी और आहत हैं। पंत से लोगों का लगाव अंतिम यात्रा में भी झलका। हजारों लोग जार-जार रो रहे थे। कह रहे थे कि ऐसा नेता मिलना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।

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