करवाचौथ पर सुहागिनें पति की लंबी उम्र के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। रखकर शाम के समय प्रदोष काल और मध्यरात्रि के दौरान भगवान शिव व माता पार्वती, भगवान गणेश, कुमार कार्तिकेय आदि देवताओं का पूजन करती हैं। इस दिन चंद्रमा का पूजन, दर्शन और अर्घ्य देने के बाद ही महिलाएं अपने पति के हाथों से जल ग्रहण करके अपना व्रत खोलती हैं, लेकिन इस बार भद्रा का साया इस समय तक रहेगा।
करवाचौथ के दिन रात 7.38 बजे चंद्रोदय होगा, लेकिन भद्रा 7.58 बजे तक रहेगी। हालांकि इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रात 9 बजे तक रहेगा, ऐसे में रात 8 बजे से 9 बजे के बीच पूजन करना उत्तम और कल्याणकारी होगा। इस दिन चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र और वृष राशि में होने के कारण कन्या, मिथुन, मकर, कुंभ, वृष औरतुला राशि की महिलाओं को पूजा का विशेष लाभ होगा।
सुहागिन महिलाओं के अखंड सौभाग्य के पर्व करवाचौथ पर सालों बाद तीन अद्भुत संयोग बन रहे हैं। इस दिन संकष्टी गणेश चतुर्थी होने के कारण यह पर्व महिलाओं के लिए और भी शुभ हो गया है। इसके अलावा करीब 11 साल बाद करवाचौथ के दिन ग्रहों के ऐसे संयोग बन रहे हैं, जो राजयोग, सर्वार्थ सिद्धि और अमृत योग लेकर आ रहे हैं। इन तीन बड़े शुभ योगों की वजह से व्रत और पूजा के लिए करवाचौथ का दिन और खास हो जाएगा।
4 of 6
karva chauth
- फोटो : rajeev gupta amarujala dehradun
ज्योतिषाचार्य पंडित संदीप भारद्वाज शास्त्री व पंडित राजेश शर्मा का कहना है कि मान्यता है कि इस अद्भुत महा संयोग के दौरान किया गया हर कार्य सफल होता है। इस दौरान की गई पूजा, व्रत का लाभ भी कई गुना अधिक हो जाता है। करवाचौथ वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें।
इसके बाद मंत्र का उच्चारण करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिन भर निर्जला व्रत रखें। दीवार पर गेरू से फलक बनाएं और भीगे चावलों को पीसकर घोल तैयार कर लें। इस घोल से फलक पर करवा का चित्र बनाएं। इसके बाद आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। मीठे में हलवा या खीर बनाएं और पकवान भी तैयार करें।