हरिद्वार अर्द्घकुंभ में इन 10 सस्ती जगहों पर भी घूम सकते हैं आप
दक्ष महादेव मंदिर एक पुराना मंदिर है जो भगवान् शिव को समर्पित है। यह हरिद्वार से लगभग 4 किमी दूर स्थित है। इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1810 में पहले रानी धनकौर ने करवाया था और 1962 में इसका पुनर्निर्माण किया गया।पौराणिक कथाओं के अनुसार इस स्थान पर दक्ष यज्ञ किया गया था। यह यज्ञ देवी सती के पिता दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित किया गया था। उन्होंने इस यज्ञ में अपने दामाद भगवान् शिव को छोड़कर सभी को आमंत्रित किया। अपने पिता के ऐसे व्यवहार के कारण सती ने स्वयं को बहुत अपमानित महसूस किया एवं यज्ञ की पवित्र अग्नि में अपने जीवन का बलिदान दे दिया।
इस मंदिर में एक छोटा गड्ढा है और ऐसा माना जाता है कि यह वही स्थान है जहाँ देवी सती ने अपने जीवन का बलिदान दिया था। मंदिर के मध्य में भगवान् शिव की मूर्ती लैंगिक रूप में रखी गई है। प्रत्येक वर्ष हिंदू महीने सावन में भक्त बड़ी संख्या में यहाँ प्रार्थना करने आते हैं।
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भारत माता मंदिर, जो मदर इंडिया मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है, हरिद्वार में एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भारत माता को समर्पित है एवं इसका निर्माण प्रसिद्ध धार्मिक गुरु स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी द्वारा करवाया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने वर्ष 1983 में इस मंदिर का उद्घाटन किया था। इस मंदिर में आठ मंजिलें हैं एवं यह 180 फुट की उंचाई पर स्थित है। इस पवित्र स्थल की प्रत्येक मंजिल विभिन्न देवी देवताओं एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को समर्पित है।
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चंडी देवी मंदिर उत्तराखण्ड की पवित्र धार्मिक नगरी हरिद्वार में नील पर्वत के शिखर पर स्थित है। यह गंगा नदी के दूसरी ओर अवस्थित है। यह देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। चंडी देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। किवदंतियों के अनुसार चंडी देवी ने शुंभ-निशुंभ के सेनापति 'चंद' और 'मुंड' को यहीं मारा था। जबकि एक अन्य लोककथा के अनुसार नील पर्वत वह स्थान है, जहाँ हिन्दू देवी चंडिका ने शुंभ और निशुंभ राक्षसों को मारने के बाद कुछ समय आराम किया था।
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भारत के उत्तरांचल राज्य के रुड़की शहर में पिरान कलियर उर्स का आयोजन होता है। मेले का आयोजन रूडकी के समीप ऊपरी गंग नहर के किनारे जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पिरान कलियर गांव में होता है। इस स्थान पर हजरत मखदूम अलाउदीन अहमद ‘‘साबरी‘‘ की दरगाह है। यह स्थान हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच एकता का सूत्र है। यहां पर हिन्दु व मुसलमान मन्नते मांगते है व चादरे चढाते हैं। मेले स्थल पर दरगाह कमेटी द्वारा देश/विदेश से आने वाले जायरिनों/श्रद्वालुओं के लिये आवास की उचित व्यवस्था है। दरगाह के बाहर खाने पीने की अच्छी व्यवस्था उपलब्ध है।
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उत्तरांचल में हिमालय पर्वतों के तल में बसा ऋषिकेश में नीलकंठ महादेव मंदिर प्रमुख पर्यटन स्थल है। नीलकंठ महादेव मंदिर ऋषिकेश के सबसे पूज्य मंदिरों में से एक है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने इसी स्थान पर समुद्र मंथन से निकला विष ग्रहण किया गया था। उसी समय उनकी पत्नी, पार्वती ने उनका गला दबाया जिससे कि विष उनके पेट तक नहीं पहुंचे। इस तरह, विष उनके गले में बना रहा। विषपान के बाद विष के प्रभाव से उनका गला नीला पड़ गया था। गला नीला पड़ने के कारण ही उन्हें नीलकंठ नाम से जाना गया था। अत्यन्त प्रभावशाली यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर परिसर में पानी का एक झरना है जहाँ भक्तगण मंदिर के दर्शन करने से पहले स्नान करते हैं।