फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

एक मुस्लिम से जुड़ी है बदरीनाथ की अनोखी कहानी, जानिए धाम के बारे में 10 रोचक बातें...

Fri, 10 May 2019 04:37 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Fri, 10 May 2019 04:37 PM IST
विज्ञापन
Badrinath dham story related to muslim unknown facts before door open 2019
कपाट खुलने से पहले सजा बदरीनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला

बदरीनाथ धाम के कपाट 10 मई को सुबह सवा चार बजे तीर्थयात्रियों के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। लेकिन हिंदूओं की आस्था के प्रतीक बदरीनाथ धाम के बारे में क्या आप जानते हैं कि इसकी कहानी एक मुस्लिम से भी जुड़ी है। चलिए जानते हैं धाम के बारे में ऐसी ही कुछ रोचक बातें। 

Badrinath dham story related to muslim unknown facts before door open 2019
badrinath aarti

बता दें कि बदरीनाथ धाम में होने वाली आरती एक मुस्लिम शायर ने लिखी है। ये शायर हैं फकरुद्दीन (बदरुद्दीन), जो चमोली जिले के नंदप्रयाग के रहने वाले थे। उन्होंने यह आरती महज 18 साल की उम्र में वर्ष 1865 में लिखी थी। तकरीबन 152 सालों से लगातार कपाट खुलने से बंद होने तक मंदिर में रोज सुबह-शाम यह आरती होती है। इस आरती में बदरीनाथ धाम के धार्मिक महत्व के अलावा यहां की सुंदरता के बारे में भी बताया गया है।

Badrinath dham story related to muslim unknown facts before door open 2019

कहा जाता है कि बदरीनाथ की मूर्ति शालिग्राम शिला से बनी हुई है। यह मूर्ति चतुर्भुज ध्यानमुद्रा में है। सिद्ध ऋषि-मुनि इसके प्रधान अर्चक थे। जब यहां बौद्धों का प्रभाव बढ़ा तब उन्होंने इसे बुद्ध की मूर्ति मानकर पूजा आरंभ की। शंकराचार्य की प्रचार-यात्रा के समय बौद्ध तिब्बत भागते हुए मूर्ति को अलकनंदा में फेंक गए। तब शंकराचार्य ने अलकनंदा से पुन: बाहर निकालकर उसकी स्थापना की। इसके बाद मूर्ति पुन: स्थानांतरित हो गयी और तीसरी बार तप्तकुंड से निकालकर रामानुजाचार्य ने इसकी स्थापना की। मंदिर में नर-नारायण विग्रह की पूजा होती है और अखंड दीप जलता है, जो कि अचल ज्ञानज्योति का प्रतीक है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Badrinath dham story related to muslim unknown facts before door open 2019

आपको जानकार हैरानी होगी कि बदरीनाथ में जिस दिन कपाट खुलते हैं उस दिन रावल साड़ी पहनकर पार्वती का श्रृंगार करके ही गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। इसके बाद पूजा-अर्चना होती है और तभी कपाट खोले जाते हैं। इस मान्यता की वजह से ही पहाड़ में रावल को लोग भगवान की तरह पूजते हैं। वे उन्हें पार्वती का रूप भी मानते हैं। पहाड़ में जो लोग रावल को नहीं पूजते हैं, उन्हें अच्छा नहीं माना जाता है।

विज्ञापन
Badrinath dham story related to muslim unknown facts before door open 2019

बद्रीनाथ के दो और नाम दिए गए हैं। बदरीनाथ एवं बद्रीविशाल। जानकारों के मुताबिक बद्रीनाथ क्षेत्र में बदरी (बैर) के जंगल थे, इसलिए इस क्षेत्र में स्थित विष्णु के विग्रह को बद्रीनाथ की संज्ञा प्राप्त हुई। बद्रीनाथ धाम में पुजारी केरल के ब्राह्मण होते हैं। मंदिर में पूजा करने का अधिकार सिर्फ इन्हें ही होता है। केरल के नंबूदरीपाद ब्राह्मणों में से रावल का चयन बद्रीनाथ मंदिर समिति ही करती है। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed