बद्रीविशाल की जयकारों के साथ सोमवार को बदरीनाथ के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं।
ब्रह्म मुहूर्त में खुले बदरीनाथ के कपाट, जयकारों से गूंजी बदरीपुरी, तस्वीरों में देखिए...
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इससे पहले प्रातः मंदिर मुख्य सिंह द्वार को फूल मालाओं से भव्य रूप से सजाया गया था। सुबह साढ़े तीन बजे बदरीनाथ के दक्षिण द्वार (लक्ष्मी द्वार) से भगवान कुबेर की डोली के साथ बामणी गांव के वृतिदारों ने परिक्रमा परिसर में प्रवेश किया।
अगले छह माह भगवान बद्रीविशाल के साथ कुबेर व उद्धव पूजे जाएंगे। साथ ही लक्ष्मी जी मुख्य मंदिर से परिक्रमा में अपने मंदिर में विराजमान हुई। इससे पहले शीतकाल में भगवती लक्ष्मी भगवान बद्रीविशाल के साथ विराजमान थी। जबकि उद्धव जी के मुख्य मंदिर में विराजमान होने से पहले श्रीमान रावल ने लक्ष्मी जी को गर्भगृह से लक्ष्मी मंदिर में विराजित किया।
कपाट खुलने पर भगवान बद्रीविशाल के निर्माण दर्शनों का विशेष महत्व है। इस दौरान भगवान बद्रीविशाल के साथ नर-नारायण के दर्शनों का लाभ अर्जित किया जाता है ।कपाट खुलने पर भगवान बद्रीविशाल का मुख्य प्रसाद घृत कम्बल श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। इससे पहले शीतकाल में भगवान बद्रीविशाल पर घृत का लेप किया जाता है जिसे कपाट खुलने पर भक्तों में बांटा जाता है।