बच्चों की किलकारियों और हंसी-ठिठोलियों से जहां घरों को गुलजार होना चाहिए था, वे जेल की चहारदीवारी के भीतर कैद होकर रह गई हैं। महिला बंदियों और कैदियों के साथ उनके छोटे-छोटे बच्चों के जीवन की शुरूआत ही सलाखों के पीछे हो रही है। वहीं जीवन के अंतिम पड़ाव में भी कई बुजुर्ग बंदी और कैदी अपनी सजा काट रहे हैं।
आजादी की चाह: जिन किलकारियों से घर-आंगन होना था गुलजार, वो जेल की चहारदीवारी में कैद, सलाखों के पीछे है दर्द
जीवन के अंतिम पड़ाव भी सलाखों के पीछे
जीवन के एक पड़ाव की शुरूआत ही जहां जेल में अपराधियों और आरोपियों के बीच हो रही है, वहीं दूसरी ओर जीवन के अंतिम पड़ाव में कई बुजुर्ग सलाखों के पीछे हैं। उम्र के जिस दौर में आकर लोगों को परिवार की खास जरूरत होती है उसमें अपने गुनाहों की सजा काट रहे हैं बुजुर्ग बंदी और कैदी। अकेले हल्द्वानी जेल में ही 60-67 आयु वर्ग के पांच व्यक्ति और 70-77 आयु वर्ग के तीन लोग जेल में बंद हैं।
यह कहते हैं मनोविज्ञानी
सुशीला तिवारी अस्पताल में तैनात मनोविज्ञानी डॉ. युवराज पंत का कहना है कि करीब पांच साल की उम्र तक बच्चों का विकास काफी तेजी से होता है। वहीं उम्र के शुरूआती दौर में ही जब बच्चे एक सीमित परिवेश में ही रहें तो उनका विकास भी सीमित हो जाता है। अपने आसपास केवल अपराधी प्रवृत्ति के लोग और उनकी बातें कहीं न कहीं उनके मन में घर करने लगती हैं। साथ ही एक डर का माहौल बनने की भी आशंका रहती है। उनके मुताबिक कई बार कुछ बच्चों के मन मस्तिष्क पर असर इतना गहरा हो जाता है कि बच्चे उम्र बढ़ने के बाद भी उन यादों से दूर नहीं जा पाते हैं।
बच्चों समेत जेल में रह रहीं महिला बंदी-कैदी
जेल महिला बच्चे लड़के लड़की
हल्द्वानी चार पांच तीन दो
टिहरी तीन पांच दो तीन
ये भी पढ़ें...कामयाबी: वनस्पति वैज्ञानिकों ने विकसित की नीम की छह प्रजातियां, इन उत्पादों में होता है नीम के तेल का इस्तेमाल
उम्र बतौर बच्चों की संख्या
हल्द्वानी जेल
लड़के 03 वर्ष, 01 वर्ष 03 माह, 03 वर्ष 02 माह
लड़की 04 वर्ष 02 माह, 02 वर्ष 06 माह
टिहरी जेल
लड़के चार माह और नौ माह
लड़की तीन साल, पांच साल और सवा साल