उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में एक ऐसा जानवर दिखाई जो देखते ही देखते पक्षी बन गया। इस दुलर्भ नजारे को देख स्थानीय लोग रोमांच से भर गए।
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उत्तराखंड में दिखा ऐसा जानवर जो देखते ही देखते बन गया 'पक्षी'
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 31 Aug 2017 09:00 AM IST
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- फोटो : amarujala
दुर्लभ उड़न गिलहरी (ओद) को पिथौरागढ़ में सुबह कुछ लोगों ने प्राथमिक विद्यालय गर्ब्यालखेड़ा के परिसर में फुदकते देखा। जैसे ही लोगों की भीड़ इसे देखने के लिए जुटी तो यह करीब दस मीटर की छलांग लगाकर पास ही स्थित एक पेड़ पर चढ़ गई। बता दें कि गिलहरी को कुतरने वाले जानवरों की श्रेणी में रखा गया है।
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इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच खाल की एक झिल्ली होती है। यह एक पेड़ से दूसरे पेड़ में जाने के लिए अपने पैर फैलाकर कूद जाते हैं और पक्षियों की तरह दूर तक चले जाती है, लेकिन यह अपने पैर फैलाकर ग्लाइडिंग करती है, उड़ती नहीं हैं। बताया गया कि वनों में इनका जीवनकाल लगभग 6 साल का होता है, लेकिन जैसे चिड़ियाघर में इनका जीवनकाल 15 साल तक का हो सकता है। यह निशाचर होता है।
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वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि पहली बार ओद को आबादी में देखा गया। वैसे यह घाटी वाले क्षेत्रों में भी कभी-कभार दिख जाती है। ज्यादातर च्यूरा फल के पेड़ों के आसपास ओद की सक्रियता रहती है। काफी देर तक यह ओद पेड़ पर बैठी रही। बाद में लोगों की सूचना पर पहुंचे वन रेंजर एसके आर्य ने बताया कि आबादी वाले इलाके में ओद नहीं दिखती।
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उन्होंने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र के दर, बौंगलिंग, जुम्मा, रांथी, हिमखोला और नेपाल के हुती, बारमिली, थारा, हिकला इलाके में कुछ समय पहले तक ओद की संख्या बहुत थी। अब इन इलाकों पर भी ओद कम हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ओद को संरक्षित किया जाना चाहिए। इसके शिकार पर कड़ी सजा का प्रावधान है।