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राहु-केतु आपके जीवन में डाल सकते हैं बुरा असर, बचाव के लिए करेंगे ये उपाय तो होगा लाभ

Sat, 28 Apr 2018 07:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 28 Apr 2018 07:53 AM IST
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affect of rahu ketu in your life
rahu ketu - फोटो : rahu ketu

ज्योतिषशास्त के अनुसार राहु-केतु आपके जीवन में बुरा असर डाल सकते हैं। लेकिन यह सब आपकी कुंडली में उनकी जगह के अनुसार होता है।

affect of rahu ketu in your life
राशिचक्र
ज्योतिषाचाय पंडित रमेश सेमवाल ने बताया कि सूर्य और चंद्रमा आत्मा एवं मन के कारक माने गए हैं। वहीं बुध ग्रह को ज्ञान, सोच एवं चिंतन का कारक माना जाता है। इन्हीं ग्रहों के शुभ-अशुभ प्रभाव का असर जातक के व्यवहार एवं निर्णय पर होता है। राशि चक्र की बारह राशियां, आभामंडल के नौ ग्रह और 27 नक्षत्रों के फलस्वरूप जातक के कार्यों पर इनके प्रभाव का फल स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है। जातक के वर्तमान एवं भविष्य के सभी निर्णय इन ग्रह-नक्षत्रों से प्रभावित होते हैं। यथा- सूर्य से मस्तक, वाणी, प्रेम, उद्वेग तथा संवेग चंद्र (अर्थात् मन) से नियंत्रित होते हैं।
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zodiac - फोटो : zodiac
ज्योतिषीय गणना में बारह राशियों के साथ बारह भावों का विशेष स्थान सुख-दुख, संतान आजीविका आदि का विचार इन्हीं भावों से किया जाता है। प्रथम भाव (तनु) लग्न, चतुर्थ भाव सुख, इस तरह कुंडली में बारह भावों का एक निश्चित स्थान है। जातक की जन्म कुंडली में अगर लग्नेश कमजोर है, तो जातक का व्यक्तित्व नकारात्मक एवं निराशाजनक होगा। इस तरह कुंडली के एक-एक भाव से कई प्रकार की गणना की जाती है। चंद्रमा मन का कारक है। अगर इस पर पाप ग्रह का प्रभाव है, तो जातक प्रसन्नचित नहीं रह पाता है।
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tension
जन्म कुंडली का चौथा घर सुख स्थान है। इस भाव में पाप ग्रह, मंगल, शनि, राहु आदि होते हैं, तो जातक वांछित सुख से प्राय: वंचित होते हैं। चतुर्थ भाव के कारक ग्रह चंद्रमा और बुध हैं। यदि चंद्रमा और बुध भी पाप ग्रह के प्रभाव में हों, तो जातक अत्यधिक तनाव ग्रस्त, भावुक होता है। निराशावादी दृष्टिकोण, सोचने की तार्किक शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के फलस्वरूप अवसाद ग्रस्त होने की उम्मीद बढ़ जाती है। 
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डेमो - फोटो : डेंमो
जातक का पंचम भाव पुत्र, विद्या, बुद्धि, यंत्र, मंत्र, तन्त्र, प्रबंध, राज, चिंता आदि को दर्शाता है। यदि जातक के इस भाव पर पाप ग्रह का प्रभाव हो, तो जातक के अवसाद ग्रस्त  होने की आशंका अत्यधिक बढ़ जाती है। छठा, आठवां और बारहवां भाव इन्हें त्रिक भी कहते हैं। इससे चिंता, उधारी, तनाव, दुश्मन और मृत्यु आदि का विचार किया जाता है। निराशा, अवसाद एवं आत्महत्या में इन भावों का इनके स्वामी का महत्वपूर्ण योगदान है। लग्न का स्वामी द्वितीय भाव में तृतीय और एकादश के स्वामी के साथ और अष्टम भाव का स्वामी अष्टम में हो, तो जातक के आत्महत्या कर लेने की आशंका बढ़ जाती है। 
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