पूरा विश्व क्रिकेट वर्ल्ड कप के रंग में रंग गया है। सभी देशों के क्रिकेट प्रेमी चाहते हैं कि उनकी टीम विश्व कप की ट्रॉफी उठाए। वर्ल्ड कप खेल रही सभी टीमों पर हर एक मैच जीतने का दबाव है और टीमों के कप्तानों पर तो दोगुना दबाव है, क्योंकि कप्तान के एक फैसले से खेल किसी भी ओर जा सकता है।
क्रिकेट इतिहास के चार सबसे बदनसीब कप्तान, जिनके हाथ कभी नहीं लगी विश्व कप ट्रॉफी
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दक्षिण अफ्रीका के सफल कप्तानों में से एक ग्रीम स्मिथ ने बतौर कप्तान दक्षिण अफ्रीका के लिए 150 मैचों में कप्तानी की, जिनमें से 92 मैच जीते हैं, 51 मैचों में हार मिली और एक मैच टाई रहा। स्मिथ ने 2007 और 2011 दो विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका की कप्तानी की। मगर उनके हाथ कप नहीं लगा।
2007 में द. अफ्रीका को ऑस्ट्रेलिया ने सेमीफाइनल में हरा कर बाहर कर दिया था, जबकि 2011 के विश्व कप के क्वार्टर फइनल में न्यूजीलैंड के सामने 222 रनों के लक्ष्य तक दक्षिण अफ्रीका की टीम नहीं पहुंच सकी और स्मिथ का विश्व कप जीतने का सपना पूरा नहीं हो पाया।
भारतीय क्रिकेट टीम में 'दादा' के नाम से मशहूर सौरभ गांगुली भारत के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में शुमार किए जाते हैं। गांगुली अपनी आक्रमकता से टीम का नेतृत्व करते थे। गांगुली को भारत की कप्तानी उस वक्त में मिली, जब भारतीय क्रिकेट अपने सबसे खराब दौर गुजर रहा था।
गांगुली ने न सिर्फ टीम को संवारा बल्कि कुछ युवा खिलाड़ियों के दम पर टीम इंडिया को 2003 विश्व कप के फाइनल में लेकर पहुंचे, लेकिन फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 125 रनों से हराकर उसके विश्व कप जीतने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। गांगुली ने 147 मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें से 76 मैचों में भारत को जीत दिलाई और 66 मैचों में हार का सामना करना पड़ा।
हैंसी क्रोनिए दक्षिण अफ्रीका के ऐसे खिलाड़ी और कप्तान रहे जो अपने खेल से कम और विवादों की वजह से अधिक चर्चा में रहे। क्रोनिए ने अफ्रीका के लिए दो विश्व कप में कप्तानी की। 1996 के विश्व कप में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका का नेतृत्व करते हुए क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन वेस्टइंडीज से हारकर उनकी टीम बाहर हो गई।
1999 के विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंची दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के बीच बेहद ही रोमांचक मुकाबला हुआ, लेकिन मैच अंततः ड्रा हुआ और रन रेट के आधार पर ऑस्ट्रेलिया फाइनल में प्रवेश कर गई। क्रोनिए का विश्व कप जीतने का सपना दूसरी बार भी पूरा नहीं हो पाया।
न्यूजीलैंड के सफल कप्तानों में एक और विश्व में रिकी पॉटिंग के बाद सर्वाधिक मैचों में कप्तानी करने वाले स्टीफेन फ्लेमिंग भी अपने विश्व कप जीतने के सपने को पूरा नहीं कर पाए। 1997 से लेकर 2007 तक न्यूजीलैंड के कप्तान रहे। फ्लेमिंग ने तीन वर्ल्ड कप में कप्तानी की।
1999 के विश्व कप में न्यूजीलैंड टॉप चार तक पहुंची, 2003 के विश्व कप में फ्लेमिंग की टीम सुपर सिक्स तक ही पहुंच पाई और 2007 विश्व कप में फ्लेमिंग न्यूजीलैंड को सेमीफाइनल तक लेकर पहुंचे, लेकिन श्रीलंका की टीम ने न्यूजीलैंड को हराकर बाहर कर दिया। इसके बाद फ्लेमिंग ने संन्यास की घोषणा कर दी। फ्लेमिंग ने 218 मैचों में कप्तानी की, जिसमें से 98 मैचों में जीत मिली, जबकि 106 मैचों में हार का सामना करना पड़ा।