भारतीय अंडर-19 टीम में खेल चुके मुंबई के क्रिकेटर सौरभ नेत्रावलकर अब अमेरिका की राष्ट्रीय टीम की कप्तानी करते दिखेंगे। 2010 अंडर-19 विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा रहे सौरभ ने शानदार प्रदर्शन किया था। मुंबई के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज ने तब विश्व कप में सर्वाधिक विकेट चटकाए थे। तीन साल के बाद सौरभ ने कर्नाटक के खिलाफ मुंबई की ओर से रणजी ट्रॉफी मैच खेला और तीन विकेट चटकाए।
उल्लेखनीय है कि सौरभ ने रणजी ट्रॉफी में एकमात्र मैच ही खेला। 2015 में वह कंप्यूटर इंजीनियर बनने के लिए अमेरिका गए। नेत्रावलकर क्रिकेट में अपने भविष्य को लेकर संतुष्ट नहीं थे। सौरभ ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, 'मैंने अपने दो साल क्रिकेट को दिए और खूब मन लगाकर खेला, लेकिन एहसास हुआ कि मैं अपने खेल को अगले स्तर पर नहीं ले जा पा रहा हूं। इसके बाद मैंने पढ़ाई पर फोकस किया और मुंबई की सरदार पटेल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट किया। इसके बाद अमेरिका की कोरनेल यूनिवर्सिटी में मास्टर करने लिए एडमिशन ले लिया।'
अमेरिका में अपनी मास्टर डिग्री के दौरान सौरभ को फिर क्रिकेट खेलना का मौका मिला। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट खेला और ओराकल में नौकरी जॉइन करने के बावजूद क्रिकेट खेलना जारी रखा। 27 वर्षीय नेत्रावलकर हर सप्ताह सैन फ्रांसिस्को से लॉस एंजिल्स क्रिकेट खेलने आया करते थे।
नेत्रावलकर ने कहा, 'हर शुक्रवार मैं ऑफिस से जल्दी निकलकर अपने साथी क्रिकेटर्स के साथ 6 घंटे की ड्राइव करके लॉस एंजिल्स आता हूं और यहां शनिवार को 50 ओवर का मैच खेलता हूं। इसके बाद रात में फिर ड्राइव कर वापस लौटते हैं और रविवार को यहां भी 50 ओवर का एक मैच खेलते हैं। सोमवार को फिर से ऑफिस जॉइन करता हूं। मैंने इस खेल के लिए कड़ी मेहनत की है, जो सिलेक्टर्स के भी दिमाग में थी। इसके बाद जनवरी में मुझे अमेरिका की राष्ट्रीय टीम में चुन लिया गया।'
अब नेत्रावलकर अमेरिकी टीम के कप्तान हैं और अगले सप्ताह यह टीम ओमान में आईसीसी वर्ल्ड क्रिकेट लीग डिविजन 3 में खेलने के लिए जाएगी। यह 2023 वन-डे विश्व कप के लिए क्वॉलिफायर टूर्नामेंट हैं। नेत्रावलकर मानते हैं कि प्रमुख टूर्नामेंट में खेलने का मौका मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है।