पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने तीन लाख से अधिक छात्रों को सफलता का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों के सपने दुनिया को जीत सकते हैं। मंगलवार को मुंबई के एसवीपी स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिग्गज खिलाड़ी ने अपने संघर्ष की दास्तां बयां की।
रांची जैसे छोटे से शहर से निकलकर क्रिकेट की दुनिया में बड़ा नाम कमाने वाले धोनी ने छात्रों के साथ अपना सफर साझा किया। उन्होंने कहा- छोटे शहरों के सपने दुनिया को जीत सकते हैं-सफलता अब पिन कोड की मोहताज नहीं है। अगर रांची का एक लड़का इसे हासिल कर सकता है, तो सही मार्गदर्शन, समर्पण और मानसिकता के साथ कोई भी ऐसा कर सकता है।
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युवराज और धोनी
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धोनी की क्रिकेट यात्रा इस खेल के इतिहास में सबसे प्रेरणादायक यात्राओं में से एक रही है। रेलवे स्टेशन पर टिकट कलेक्टर के रूप में काम करने के बाद वह भारत के सबसे बड़े ट्रॉफी कलेक्टर भी बन गए और टीम की कप्तानी करते हुए आईसीसी टी20 विश्व कप 2007, आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2011 और आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2013 में टीम की कप्तानी की। उन्होंने 2004 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया और एक पावर हिटर के रूप में खुद का नाम बनाया।
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जडेजा और धोनी
- फोटो : IPL/BCCI
उन्होंने आगे कहा- पर्दे के पीछे होने वाली तैयारियों पर ध्यान दें, यही वह चीज है जो बड़े मंच पर धैर्य और उसके बाद आने वाले नतीजों की ओर ले जाती है। वर्तमान में जिएं और हर पल का आनंद लें - मैंने कभी भारत के लिए खेलने के बारे में नहीं सोचा, मैं केवल बड़े होने के दौरान खेले गए हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान केंद्रित करता था।
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महेंद्र सिंह धोनी
- फोटो : IPL
इस दौरान धोनी ने छात्रों को अपनी असफलताओं से सीखने और आगे बढ़ते रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा- सफलता और असफलता जीवन का हिस्सा हैं। असफलताओं से सीखना और आगे बढ़ते रहना ही मुख्य बात है। नेताओं का सम्मान, चुनौतियों को स्वीकार करना और कड़ी मेहनत करना ऐसे अपूरणीय मूल्य हैं जो सफलता को परिभाषित करते हैं।