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किस तरह अगरकर से बीसीसीआई का हुआ मोह भंग: क्या रोहित के भविष्य को लेकर चला विवाद बना वजह? कैसा रहा कार्यकाल
Sat, 19 Sep 2026 06:49 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sat, 19 Sep 2026 06:49 PM IST
सार
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर के रास्ते 2027 के वनडे विश्व कप से पहले जुदा हो गए। अगरकर के भविष्य को लेकर पिछले कई दिनों से अटकलों का बाजार गर्म था। इसे तब और ज्यादा हवा मिली जब अगरकर हाल ही में बीसीसीआई की चयन समिति की बैठक में शामिल नहीं हुए। आइए जानते हैं किस तरह बीसीसीआई का अगरकर से मोह भंग हुआ...
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अजीत अगरकर
- फोटो : PTI
अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप से पहले नया चयनकर्ता चुना जाएगा। बताया जा रहा है कि अजीत अगरकर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को बता दिया है कि वह आगे पद पर नहीं बने रहना चाहते हैं। अगरकर का कार्यकाल अगले महीने की शुरुआत में खत्म हो रहा है। पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर चल रहा विवाद और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के साथ मतभेद अगरकर और बीसीसीआई के बीच रिश्ते टूटने की प्रमुख वजह बने।
अजीत अगरकर
- फोटो : IANS
समीक्षा बैठक से नदारद रहने पर उठे सवाल
अगरकर के जाने की पटकथा उस समय लगभग लिखी जा चुकी थी, जब इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा के लिए मुंबई में बुलाई गई अहम बैठक से उन्होंने दूरी बना ली। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भले ही उनका बचाव किया, लेकिन बोर्ड के भीतर एक वर्ग का मानना था कि इतनी महत्वपूर्ण बैठक में चयन समिति के अध्यक्ष की मौजूदगी जरूरी थी। अगरकर विश्व कप तक पद पर बने रहने के इच्छुक थे, लेकिन पिछले एक महीने में बीसीसीआई की ओर से लगातार ऐसे संकेत मिल रहे थे कि बोर्ड अब चयन समिति में नए चेहरे की तलाश कर रहा है।
अगरकर के जाने की पटकथा उस समय लगभग लिखी जा चुकी थी, जब इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा के लिए मुंबई में बुलाई गई अहम बैठक से उन्होंने दूरी बना ली। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भले ही उनका बचाव किया, लेकिन बोर्ड के भीतर एक वर्ग का मानना था कि इतनी महत्वपूर्ण बैठक में चयन समिति के अध्यक्ष की मौजूदगी जरूरी थी। अगरकर विश्व कप तक पद पर बने रहने के इच्छुक थे, लेकिन पिछले एक महीने में बीसीसीआई की ओर से लगातार ऐसे संकेत मिल रहे थे कि बोर्ड अब चयन समिति में नए चेहरे की तलाश कर रहा है।
अगरकर
- फोटो : ANI
सफल रहा है अगरकर का कार्यकाल
आम तौर पर बोर्ड ऐसे चयनकर्ता को इतनी आसानी से नहीं हटाता, जिसकी अगुआई वाली समिति ने पिछले तीन वर्षों में सीमित ओवरों की चार आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली टीमें चुनी हों और उनमें से तीन में खिताब भी जीते हों। भारत ने इस दौरान दो टी20 विश्व कप और एक चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम की। वहीं, 2023 वनडे विश्व कप की टीम भी अगरकर ने चुनी थी जो उपविजेता रही थी।
आम तौर पर बोर्ड ऐसे चयनकर्ता को इतनी आसानी से नहीं हटाता, जिसकी अगुआई वाली समिति ने पिछले तीन वर्षों में सीमित ओवरों की चार आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाली टीमें चुनी हों और उनमें से तीन में खिताब भी जीते हों। भारत ने इस दौरान दो टी20 विश्व कप और एक चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम की। वहीं, 2023 वनडे विश्व कप की टीम भी अगरकर ने चुनी थी जो उपविजेता रही थी।
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अगरकर
- फोटो : ANI
बीसीसीआई की कौन सी बात अगरकर को चुभी?
अगरकर और बीसीसीआई के बीच रिश्तों में असली दरार रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर पैदा हुई। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से ठीक पहले तत्कालीन चयन समिति ने टीम प्रबंधन और बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ मिलकर लॉर्ड्स वनडे के बाद रोहित को वनडे टीम से आगे बढ़ने का संकेत देने का फैसला किया था। यह फैसला सामूहिक था और रोहित तक बात पहुंचाने की जिम्मेदारी दक्षिण क्षेत्र के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा को दी गई, जो रोहित के करीबी मित्रों में माने जाते हैं।
रोहित 2027 वनडे विश्व कप खेलना चाहते हैं और उन्हें यह संदेश पसंद नहीं आया। उन्होंने एक प्रभावशाली बोर्ड पदाधिकारी से बात कर चयन समिति के अध्यक्ष के रवैये पर अपनी नाराजगी जाहिर की। मामला तब और पेचीदा हो गया, जब बीसीसीआई ने लॉर्ड्स वनडे के बाद रोहित के संन्यास की अटकलों को खारिज करते हुए सार्वजनिक बयान जारी कर दिया। अगरकर के करीबी लोगों के मुताबिक, वह इस घटनाक्रम से आहत और नाराज थे।
बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि अगरकर को इस बयान की पहले से जानकारी तक नहीं थी। बोर्ड चाहता था कि रोहित के भविष्य पर फैसला लेने में जल्दबाजी नहीं की जाए। दूसरी ओर, अगरकर का मानना था कि अगर 2027 विश्व कप में यशस्वी जायसवाल को आजमाना है तो उन्हें पर्याप्त वनडे खेलने का मौका देना होगा। रोहित के पक्ष में तर्क यह था कि वह लगभग हर तीसरे वनडे में रन बना रहे थे, जबकि अगरकर के नजरिए से दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों में उम्रदराज रोहित की निरंतर प्रभावशाली बल्लेबाजी की कोई गारंटी नहीं थी।
अगरकर और बीसीसीआई के बीच रिश्तों में असली दरार रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर पैदा हुई। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से ठीक पहले तत्कालीन चयन समिति ने टीम प्रबंधन और बीसीसीआई के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ मिलकर लॉर्ड्स वनडे के बाद रोहित को वनडे टीम से आगे बढ़ने का संकेत देने का फैसला किया था। यह फैसला सामूहिक था और रोहित तक बात पहुंचाने की जिम्मेदारी दक्षिण क्षेत्र के चयनकर्ता प्रज्ञान ओझा को दी गई, जो रोहित के करीबी मित्रों में माने जाते हैं।
रोहित 2027 वनडे विश्व कप खेलना चाहते हैं और उन्हें यह संदेश पसंद नहीं आया। उन्होंने एक प्रभावशाली बोर्ड पदाधिकारी से बात कर चयन समिति के अध्यक्ष के रवैये पर अपनी नाराजगी जाहिर की। मामला तब और पेचीदा हो गया, जब बीसीसीआई ने लॉर्ड्स वनडे के बाद रोहित के संन्यास की अटकलों को खारिज करते हुए सार्वजनिक बयान जारी कर दिया। अगरकर के करीबी लोगों के मुताबिक, वह इस घटनाक्रम से आहत और नाराज थे।
बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि अगरकर को इस बयान की पहले से जानकारी तक नहीं थी। बोर्ड चाहता था कि रोहित के भविष्य पर फैसला लेने में जल्दबाजी नहीं की जाए। दूसरी ओर, अगरकर का मानना था कि अगर 2027 विश्व कप में यशस्वी जायसवाल को आजमाना है तो उन्हें पर्याप्त वनडे खेलने का मौका देना होगा। रोहित के पक्ष में तर्क यह था कि वह लगभग हर तीसरे वनडे में रन बना रहे थे, जबकि अगरकर के नजरिए से दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों में उम्रदराज रोहित की निरंतर प्रभावशाली बल्लेबाजी की कोई गारंटी नहीं थी।
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वीवीएस लक्ष्मण
- फोटो : BCCI
किस तरह लक्ष्मण से अगरकर का विवाद बढ़ा
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी थाा कि भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार खिलाड़ियों के संन्यास या भविष्य पर अंतिम फैसला वास्तव में किसका होना चाहिए? अगरकर के लिए यह चयन समिति के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा था, जबकि भारतीय क्रिकेट की परंपरा में बड़े सितारों से जुड़े ऐसे फैसलों में बोर्ड प्रशासन की भूमिका हमेशा प्रभावी रही है। अगरकर और लक्ष्मण लंबे समय तक भारतीय टीम में साथ खेल चुके थे, लेकिन बाद में नीतिगत मामलों पर दोनों के बीच मतभेद गहराते गए। खासकर चोटिल खिलाड़ियों के प्रबंधन और भारत ए टीम के कार्यक्रम को लेकर दोनों की राय अलग-अलग थी।
सीओई से जुड़े राज्य टीम के एक पूर्व कोच के अनुसार, लक्ष्मण हमेशा सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध टीम को मैदान पर उतारने के पक्षधर रहे हैं। अगरकर को हालांकि यह समझना मुश्किल लगा कि एशियाई खेलों जैसे आयोजन में भारत को अपनी पहली पसंद के खिलाड़ियों के साथ खेलने की जरूरत क्यों है। हांग्झोउ एशियाई खेलों के दौरान भारत की कप्तानी ऋतुराज गायकवाड़ ने की थी, क्योंकि मुख्य टीम वनडे विश्व कप में व्यस्त थी। लेकिन इस बार भारत की वनडे टीम में श्रेयस अय्यर, जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, ईशान किशन और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे। इनमें से कई खिलाड़ी पहली पसंद की टीम का हिस्सा रहे हैं। भारत ए के कार्यक्रम ने भी दोनों के बीच मतभेद बढ़ाए।
पुडुचेरी में 22 सितंबर से दो अक्तूबर तक होने वाले दो भारत ए टेस्ट का कार्यक्रम श्रीनगर में होने वाले ईरानी कप से टकरा रहा था। इसके अलावा 24 अक्तूबर से 10 नवंबर के बीच न्यूजीलैंड ए के खिलाफ भारत ए के तीन मैचों का कार्यक्रम भारत की टी20 और वनडे सीरीज से भी टकरा रहा था। भारत ए के कार्यक्रम की जिम्मेदारी सीओई के प्रमुख और क्रिकेट संचालन टीम के पास होती है। पहले राहुल द्रविड़ भी इस जिम्मेदारी को संभाल चुके हैं। चोटिल केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ियों की वापसी को लेकर स्पष्ट समयसीमा नहीं होना भी दोनों पक्षों के बीच चर्चा और असहमति का कारण बना।
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी थाा कि भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार खिलाड़ियों के संन्यास या भविष्य पर अंतिम फैसला वास्तव में किसका होना चाहिए? अगरकर के लिए यह चयन समिति के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा था, जबकि भारतीय क्रिकेट की परंपरा में बड़े सितारों से जुड़े ऐसे फैसलों में बोर्ड प्रशासन की भूमिका हमेशा प्रभावी रही है। अगरकर और लक्ष्मण लंबे समय तक भारतीय टीम में साथ खेल चुके थे, लेकिन बाद में नीतिगत मामलों पर दोनों के बीच मतभेद गहराते गए। खासकर चोटिल खिलाड़ियों के प्रबंधन और भारत ए टीम के कार्यक्रम को लेकर दोनों की राय अलग-अलग थी।
सीओई से जुड़े राज्य टीम के एक पूर्व कोच के अनुसार, लक्ष्मण हमेशा सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध टीम को मैदान पर उतारने के पक्षधर रहे हैं। अगरकर को हालांकि यह समझना मुश्किल लगा कि एशियाई खेलों जैसे आयोजन में भारत को अपनी पहली पसंद के खिलाड़ियों के साथ खेलने की जरूरत क्यों है। हांग्झोउ एशियाई खेलों के दौरान भारत की कप्तानी ऋतुराज गायकवाड़ ने की थी, क्योंकि मुख्य टीम वनडे विश्व कप में व्यस्त थी। लेकिन इस बार भारत की वनडे टीम में श्रेयस अय्यर, जसप्रीत बुमराह, अक्षर पटेल, ईशान किशन और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे। इनमें से कई खिलाड़ी पहली पसंद की टीम का हिस्सा रहे हैं। भारत ए के कार्यक्रम ने भी दोनों के बीच मतभेद बढ़ाए।
पुडुचेरी में 22 सितंबर से दो अक्तूबर तक होने वाले दो भारत ए टेस्ट का कार्यक्रम श्रीनगर में होने वाले ईरानी कप से टकरा रहा था। इसके अलावा 24 अक्तूबर से 10 नवंबर के बीच न्यूजीलैंड ए के खिलाफ भारत ए के तीन मैचों का कार्यक्रम भारत की टी20 और वनडे सीरीज से भी टकरा रहा था। भारत ए के कार्यक्रम की जिम्मेदारी सीओई के प्रमुख और क्रिकेट संचालन टीम के पास होती है। पहले राहुल द्रविड़ भी इस जिम्मेदारी को संभाल चुके हैं। चोटिल केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ियों की वापसी को लेकर स्पष्ट समयसीमा नहीं होना भी दोनों पक्षों के बीच चर्चा और असहमति का कारण बना।