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'अश्वेत होने की वजह से कोई साथ में खाना नहीं खाता था, हार का ठीकरा मेरे सिर फोड़ा जाता'

Sat, 18 Jul 2020 08:36 AM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अंशुल तलमले Updated Sat, 18 Jul 2020 08:36 AM IST
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Makhaya Ntini recalls racism in South Africa cricket, says I was forever lonely
अपने विदाई मैच में धोनी के साथ मखाया एंटिनी - फोटो : सोशल मीडिया

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज मखाया एंटिनी ने राष्ट्रीय टीम के साथ अपने समय को याद करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह नस्लवाद का शिकार रहे और हमेशा खुद को 'अकेला महसूस' करते थे। दक्षिण अफ्रीका के लिए टेस्ट में 390 और एकदिवसीय में 266 विकेट लेने वाले 43 साल के इस पूर्व खिलाड़ी ने शॉन पोलाक, जाक कैलिस, मार्क बाउचर और लांस क्लूजनर जैसे दिग्गजों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा किया है।

Makhaya Ntini recalls racism in South Africa cricket, says I was forever lonely
मखाया एंटिनी

अमेरिका में अफ्रीकी मूल के जार्ज फ्लॉयड की एक श्वेत पुलिसकर्मी के हाथों मौत के बाद विश्व भर में चल रहे ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ (अश्वेत जीवन भी मायने रखता है) आंदोलन के तहत उन्होंने अपने अनुभवों को साझा किया। एंटिनी दक्षिण अफ्रीका के उन 30 खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने 'ब्लैक लाइव्स मैटर' के समर्थन में आवाज उठाई है। उन्होंने ‘दक्षिण अफ्रीकी प्रसारण निगम’ से कहा, 'उस समय मैं हमेशा अकेले था।'

Makhaya Ntini recalls racism in South Africa cricket, says I was forever lonely
मखाया नतिनि

उन्होंने कहा, 'खाना खाने के लिए जाते समय कोई भी मुझे साथ नहीं ले जाता था। टीम के साथी खिलाड़ी मेरे सामने योजना बनाते थे, लेकिन उस में मुझे शामिल नहीं करते थे। नाश्ते के कमरे में कोई भी मेरे साथ नहीं बैठता था। हम एक जैसी वर्दी पहनते हैं और एक ही राष्ट्रगान गाते हैं, लेकिन मुझे इन सब (अलगाव) से निपटना पड़ा।'

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Makhaya Ntini recalls racism in South Africa cricket, says I was forever lonely
मखाया एंटिनी - फोटो : सोशल मीडिया

एंटिनी ने कहा कि अलगाववाद से छुटकारा पाने के लिए वह टीम बस से जाने से बचते थे और बस के पीछे दौड़ते थे। उन्होंने कहा, 'मैं बस के ड्राइवर को अपना बैग देकर मैदान तक बस के पीछे-पीछे दौड़ता था। वापसी में भी मैं ऐसा ही करता था। लोगों ने कभी यह नहीं समझा कि मैंने ऐसा क्यों करता था। मैंने भी उन्हें कभी नहीं बताया कि मैं क्या करने की कोशिश कर रहा था। मेरे लिए यह अच्छा था क्योंकि इससे मैं किसी का सामना करने से बचता था।'

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बकौल एंटिनी, 'मैं एकांतवास से दूर भागने की कोशिश करता था। बस में अगर मैं पीछे बैठता था तो वे आगे बैठ जाते थे। जब भी हम जीतते थे तो माहौल खुशनुमा होता था, लेकिन हारने के बाद ठीकरा मेरे सिर पर फोड़ा जाता था। मेरे बेटे थांडो ने भी यह अनुभव किया है, उसे अंडर-19 विश्व कप के शिविर में जाने से लगभग रोक दिया गया था।'

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