टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज रहे गौतम गंभीर ने सेना में मानद रैंक पाने वालों के प्रति कड़ा विरोध जताया है। गंभीर ने कहा है कि मैं कभी भी सेना में मानद रैंक के पक्ष में नहीं रहा, क्योंकि लोग अपना खून पसीना बहाकर सेना की वर्दी को प्राप्त करते हैं। मेरा मानना है कि सेना को किसी भी पहचान और प्रचार की जरूरत नहीं है।
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एमएस धोनी बलिदान बैज
- फोटो : सोशल मीडिया
महेंद्र सिंह धोनी विश्व कप के एक मैच में सेना का बलिदान बैज अपने ग्लव्स पर लगाकर मैदान पर उतरे थे। बलिदान बैज से भी जुड़ा सवाल भी गंभीर से पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि, 'धोनी का अपने ग्लव्स पर बलिदान बैज लगाकर खेलना सही था, अगर उन्हें ये अच्छा लगता है और वह खुद भी सेना से जुड़े हैं, तो उन्हें बलिदान बैज लगाकर खेलना चाहिए। हालांकि जरूरी यह है कि ऐसी चीजों को लेकर खबरें ना बनें।
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ms dhoni army image
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में गंभीर ने महेंद्र सिंह धोनी को लेकर कहा कि, उन्होंने सेना के साथ कश्मीर में वक्त बिताकर एक बेहतरीन काम किया, मेरा उन्हें सलाम है, लेकिन मैं सेना में मानद रैंक के खिलाफ हूं। पहले भी इस चीज को लेकर आवाज उठाता रहा हूं और सेना में इस तरह की मानद रैंक का समर्थन मैं बिल्कुल भी नहीं करता। मालूम हो कि, धोनी टेरिटोरियल आर्मी में लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि से सम्मानित हैं।
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एम एस धोनी
- फोटो : social Media
धोनी के संन्यास को लेकर गंभीर ने कहा कि, हर किसी के संन्यास का फैसला निजी होता है। जब तक आप खेलने के लिए फिट हैं, तब तक आपको खेलना चाहिए, लेकिन इसके साथ जरूरी है कि आप देश में क्रिकेट के भविष्य के बारे में भी सोचे। गौतम ने कहा कि, मैं धोनी को अगले विश्व कप तक खेलते हुए नहीं देखता हूं। इसलिए टीम के कप्तान को हिम्मत दिखाते हुए कहना चहिए कि, ये खिलाड़ी (चाहे वो कोई भी हो) हमारी भविष्य की योजनाओं में फिट नहीं बैठ रहा है।
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ऋषभ पंत-एमएस धोनी
- फोटो : social Media
अब समय है कि चार-पांच साल में युवाओं को तैयार किया जाएस, क्योंकि ये बात सिर्फ धोनी की नहीं है, ये बात देश की क्रिकेट के बारे में है। हमें अगले साल होने वाले टी-20 विश्व को जीतने के बारे में सोचना चाहिए और इसके लिए जरूरी है कि ऋषभ पंत और संजू सैमसन जैसे युवाओं को मैका दिया जाए। मुझे जहां तक लगता है, भारतीय क्रिकेट को अब धोनी से आगे देखने की जरूरत है।