टेस्ट मैच क्रिकेट का सबसे लंबा और चुनौतीपूर्ण स्वरूप है लेकिन कुछ खिलाड़ियों ने मिलकर क्रिकेट के सबसे पुराने फॉर्मेट की रूपरेखा ही बदल दी। ऐसे खिलाड़ियों को याद करते रहना लाजिमी है। ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज मैथ्यू हेडेन। जिन्हें टेस्ट क्रिकेट के सबसे विध्वंसक बल्लेबाजों में शुमार किया जाता है। 29 अक्टूबर 1971 को ऑस्ट्रेलिया के ब्रिसबेन में जन्मा यह खिलाड़ी आज 45 वर्ष का हो गया है।
Birthday Special: इस क्रिकेटर और सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट की तस्वीर बदल दी
हाल ही में भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने कहा था कि हेडेन और वीरेंद्र सहवाग ने मिलकर टेस्ट क्रिकेट की तस्वीर बदल दी। आप आज के दौर से सलामी बल्लेबाजों को देखिए, उन्हें तेजी से रन न बनाने के कारण आलोचना झेलनी पड़ती है। यह सब वीरेन्द्र सहवाग और मैथ्यू हेडन ने शुरू किया। टेस्ट में इन दोनों ने बल्लेबाजी की परिभाषा बदल दी।
Birthday Special: इस क्रिकेटर और सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट की तस्वीर बदल दी
मार्च 1994 को जोहान्सबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हेडन ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की। हेडन शुरू में माइकल स्लेटर के जोड़ीदार रहे, लेकिन मार्क टेलर के कप्तान बनने के बाद वे उनके साथ पारी शुरू करने लगे। चौदह साल लंबे क्रिकेट करियर में हेडेन ने ऑस्ट्रेलिया के लिए एक बेहतरीन ओपनर की भूमिका निभाई। उन्होंने टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में माइकल स्लेटर, मार्क टेलर, जस्टिन लेंगर, एडम गिलक्रिस्ट, मार्क वॉ और फिल जैक्स के साथ ऑस्ट्रेलियाई पारी का आगाज किया। इनमें लंबे समय तक उनके जोड़ीदार लेंगर रहे। हेडन-लेंगर की जोड़ी ने कई टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया को जबरदस्त शुरुआत दी और उन मैचों में जीत के शिल्पकार बने।
Birthday Special: इस क्रिकेटर और सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट की तस्वीर बदल दी
साल 2003 में पर्थ टेस्ट में हेडन ने जिम्बॉब्वे के खिलाफ 380 रनों की पारी खेलकर विश्व कीर्तिमान बनाया था। हालांकि यह कीर्तिमान ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका और ब्रायन लारा ने एक बार फिर 400 रनों की पारी खेलकर इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया। लेकिन हेडन की इस पारी की खासियत यह थी कि उन्होंने ये 380 रन 90 की स्ट्राइक रेट से बनाए थे।
Birthday Special: इस क्रिकेटर और सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट की तस्वीर बदल दी
संन्यास लेने से पहले हेडेन खराब फॉर्म से गुजर रहे थे। यह पहली बार नहीं था, जब हेडेन ने अपनी लय खोई। वे पहले भी दो बार टीम से खराब फॉर्म की वजह से बाहर हो चुके थे। 1994 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने वाले हेडन शुरू में कुछ खास नहीं कर पाए और उन्हें टीम से अपना स्थान गंवाना पड़ा। 1996 में हेडेन की टीम में वापसी हुई और सामान्य प्रदर्शन के दम पर एक साल तक टीम में बने रहे। इसके बाद 1997 में उन्हें टीम से बाहर जाना पड़ा और तीन साल तक उनकी टीम में वापसी नहीं हुई। इस दौरान उन्होंने कड़ी मेहनत की और 31 मार्च 2000 को न्यूजीलैंड के खिलाफ हेमिल्टन टेस्ट में उनकी टेस्ट टीम में वापसी हुई।