अगस्त की पहली तारीख से क्रिकेट की सबसे प्रतिष्ठित टेस्ट सीरीज क्रिकेट के दो सबसे पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच शुरू होगा, जिसे दुनिया एशेज के नाम से जानती है। इस टूर्नामेंट में टेस्ट क्रिकेट निखरता है। लाल गेंद का रंग खिलाड़ियों के सफेद कपड़े पर चढ़कर, इस टूर्नामेंट में जीत के लिए की गई उनकी संघर्ष की कहानी को बयां करता है।
एशेज स्पेशलः ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड के बीच खेले गए वो पांच टेस्ट मैच, जिसे लोग भुलाए नहीं भूलते
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साल 1948 में ब्रैडमैन की अगुआई में ऑस्ट्रेलिया टीम सीरीज खेलने इंग्लैंड पहुंची। पहले टेस्ट में उसने मेजबान टीम को आठ विकेट से मात दी। दूसरा टेस्ट 409 रन से अपने नाम किया। मैनचेस्टर में खेला गया तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा। चौथे टेस्ट में कंगारू टीम ने सात विकेट से इंग्लिश टीम को धूल चटाई। चौथे टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इतिहास रच दिया था। उसने 403 रन के लक्ष्य को महज तीन विकेट गंवाकर हासिल कर लिया था। आर्थुर मॉरिस ने 180 और कप्तान ब्रैडमैन ने 173 रन बनाए थे।
पांचवां टेस्ट मैच लंदन के द ओवल के मैदान पर खेला गया। यह क्रिकेट इतिहास के महान बल्लेबाज डॉन ब्रैडमैन का आखिरी मैच था। पहले बल्लेबाजी करने उतरी मेजबान इंग्लैंड की टीम महज 52 रन पर सिमट गई। ऑस्ट्रेलिया ने 389 रन बनाए, इस पारी में ब्रैडमैन शून्य पर आउट हो गए। उन्हें करियर में 100 की औसत के लिए चार रन बनाने थे, लेकिन लेग स्पिनर एरिक होलिस ने उन्हें बोल्ड कर दिया। ब्रैडमैन का करियर औसत 99.94 रह गया और इस मैच के बाद उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।
एशेज के इतिहास की सबसे विवादित सीरीज 1932-33 में खेली गई थी। डॉन ब्रैडमैन उस सीरीज में बेहतरीन फॉर्म में थे। उन्हें रोकने के लिए इंग्लिश गेंदबाजों ने शरीर को खूब निशाना बनाया, सीरीज विवादों में रही और इसे ‘बॉडीलाइन सीरीज’ का नाम मिला।
इंग्लैंड के कप्तान डगलस जार्डिन ने गेंदबाजों को ‘लेग थ्योरी’ बताई। तेज गेंदबाज हेरॉल्ड लॉरवुड ने शरीर को निशाना साध कर गेंदबाजी की। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज बिल वुडफुल को घायल कर दिया था। एडिलेड के स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने इंग्लिश टीम की हुटिंग की, लॉरवुड पर दर्शक भड़क गए। इसके बाद उन्होंने एक और ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज की पसलियां ही तोड़ दी थी। दर्शकों का गुस्सा उनके खिलाफ इतना बढ़ गया कि लॉरवुड को सुरक्षा के बीच मैदान से बाहर ले जाना पड़ा था।
साल 1981 में ऑस्ट्रेलियाई टीम छह टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने इंग्लैंड पहुंची। उस वक्त इंग्लिश टीम की कमान इयान बॉथम के हाथों में थी। सीरीज का पहला टेस्ट नॉटिंघम में मेहमान ऑस्ट्रेलिया ने चार विकेट से जीत लिया। दूसरा टेस्ट लॉर्ड्स में ड्रॉ रहा। तीसरा टेस्ट लीड्स में खेला जाना था। इससे पहले ही बॉथम ने कप्तानी से इस्तीफा दे दिया। माइक ब्रेयरली इंग्लिश टीम के नए कप्तान बने। लीड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट को इंग्लैंड ने 18 रन से जीतकर सीरीज 1-1 से बराबर कर दिया। बॉथम ने इस मैच में कुल सात विकेट चटकाए। उन्होंने पहली पारी में 50 और दूसरी पारी में नाबाद 149 रन बनाए थे।
इसके बाद इंग्लैंड ने चौथा टेस्ट भी 29 रन से अपने नाम कर लिया। इस मैच में बॉथम ने छह विकेट लिए। पांचवां टेस्ट मैनचेस्टर में खेला गया इस मैच को भी इंग्लिश की टीम ने 103 रन से जीत लिया। बॉथम ने दूसरी पारी में 118 रन बनाए। उन्होंने कुल पांच बल्लेबाजों को पवेलियन की राह पकड़ाई। आखिरी टेस्ट एजबेस्टन में ड्रॉ रहा। इस मैच में बॉथम ने 10 विकेट लिए। उन्होंने छह टेस्ट में 34 विकेट अपने नाम किए। बल्लेबाजों में बॉथम दूसरे स्थान पर रहे और 399 रन बनाए। इस दौरान दो शतक और एक अर्धशतक भी जड़ा।
2005 में रिकी पोंटिंग के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलियाई टीम पांच टेस्ट मैच की सीरीज खेलने इंग्लैंड पहुंची। पहला टेस्ट लॉर्ड्स में खेला गया, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने 239 रन से जीता। दूसरा टेस्ट एजबेस्टन में होना था, तभी ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा चोट के कारण बाहर हो गए। इस मैच को इंग्लैंड ने रोमांचक तरीके से दो रन से जीता। 282 रन का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम 279 रन पर आउट हो गई। फ्लिंटॉफ ने पहली पारी में 68 और दूसरी पारी में 73 रन बनाए। उन्होंने कुल सात ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को आउट किया। तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा, जिसमें फ्लिंटॉफ ने 50 रन बनाए और पांच विकेट भी लिए।
चौथा टेस्ट नॉटिंघम में खेला गया। इंग्लैंड ने पहली पारी में 477 रन बनाए। फ्लिंटॉफ ने 102 रन की शानदार पारी खेली। शेन वॉर्न ने पहली पारी में चार विकेट लिए। ऑस्ट्रेलिया अपनी पहली पारी में 218 रन ही बना सका और नतीजतन उसे फॉलोऑन खेलना पड़ा। उसने दूसरी पारी में 387 रन बनाए। 129 रन के लक्ष्य को इंग्लैंड ने सात विकेट पर हासिल कर लिया। मेजबान सीरीज में 2-1 से आगे हो गया। पांचवां टेस्ट ओवल में ड्रॉ रहा। फ्लिंटॉफ ने सीरीज में 402 रन बनाए और 24 विकेट भी अपने नाम दर्ज किए। इस जबरदस्त प्रदर्शन के बाद उन्हें इंग्लैंड का दूसरा बॉथम कहा जाने लगा।