पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने बुधवार को भाजपा का दामन थामा। इसके बाद से पंजाब में सियासत तेज होने लगी है। भारत जोड़ो यात्रा के बीच मनप्रीत सिंह कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। बता दें कि पंजाब के सीएम भगवंत मान को राजनीति में लाने का श्रेय मनप्रीत बादल को ही जाता है। मनप्रीत ने ही 2011 में अपनी पार्टी 'पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब' (पीपीपी) में भगवंत मान को शामिल कर 2012 विधानसभा चुनाव में लहरा सीट से प्रत्याशी बनाया था। भगवंत मान पीपीपी के चुनाव चिह्न पतंग के साथ चुनाव मैदान में उतरे लेकिन उनकी पतंग उड़ान नहीं भर सकी। इसके बाद मनप्रीत ने जब पीपीपी का कांग्रेस में विलय करने का एलान किया तो भगवंत मान ने न सिर्फ पीपीपी बल्कि मनप्रीत बादल से भी नाता तोड़ लिया और अब आम आदमी पार्टी का हिस्सा और पंजाब के सीएम हैं।
Punjab News: कौन हैं मनप्रीत बादल? जिन्होंने थामा भाजपा का दामन, भगवंत मान को राजनीति में लाने वाले यही
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अब विजिलेंस ब्यूरो के रडार पर
अब भगवंत मान के मुख्यमंत्री रहते मनप्रीत बादल पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के रडार पर हैं। उन पर गेहूं व धान की ढुलाई में फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी खजाने की लूट का आरोप है। हालांकि, मनप्रीत पर यह आरोप बठिंडा के पूर्व विधायक और भाजपा नेता सरूप चंद सिंगला ने लगाया है लेकिन कभी उनके बहुत खास रहे भगवंत मान के शासन में मनप्रीत को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
कांग्रेस में हाशिये पर थे मनप्रीत
मनप्रीत सिंह बादल पिछले नवंबर से ही कांग्रेस में हाशिए पर चल रहे थे। बुधवार को उनके पार्टी से इस्तीफे को कांग्रेस ने अच्छा छुटकारा करार दिया। हालांकि, मनप्रीत ने ऐसे समय में कांग्रेस को झटका दिया, जब पंजाब में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा चल रही है और जिस यात्रा को पंजाब में कांग्रेस की एकजुटता के लिए संजीवनी माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी मनप्रीत बादल के भाजपा में शामिल होने की चर्चा उसी समय शुरू हो गई थी, जब कैप्टन और पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने भाजपा का दामन थामा था। मनप्रीत कांग्रेस सरकार के पूरे कार्यकाल के दौरान वित्त मंत्री बने रहे लेकिन माना जा रहा है कि उनके कांग्रेस छोड़ने का एक अन्य कारण यह भी रहा कि प्रदेश कांग्रेस प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग से उनके संबंध अच्छे नहीं थे। राजा वड़िंग के प्रधान बनने के बाद से ही मनप्रीत ने प्रदेश कांग्रेस की गतिविधियों से दूरी बना ली थी।
सुखबीर बादल के चचेरे भाई हैं मनप्रीत
गिद्दड़बाहा सीट से चार बार विधायक रहे मनप्रीत बादल पुराने अकाली नेता हैं और बादल परिवार का हिस्सा हैं। मनप्रीत के पिता गुरदास सिंह बादल और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सगे भाई हैं। मनप्रीत 1995 में पहली बार अकाली दल के टिकट पर विधायक चुने गए थे। इसके बाद वह अकाली दल के ही टिकट पर 1997, 2002 और 2007 में भी गिद्दड़बाहा सीट से ही विधायक बने।
अकाली दल व भाजपा गठबंधन की सरकार में 2007 में उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया था। 2010 में अकाली दल के नेतृत्व को लेकर बादल परिवार में मनमुटाव के बीच मनप्रीत के अपने चचेरे भाई सुखबीर बादल से मतभेद हुए और उन्होंने अकाली दल छोड़कर अपनी अलग पार्टी पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) का गठन किया। 2012 के विधानसभा चुनाव में मनप्रीत ने अपनी पार्टी का सीपीआई, सीपीएम और शिअद (लोंगोवाल) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा लेकिन मनप्रीत समेत पीपीपी का कोई भी प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका।