पिछले साल की तरह इस बार भी जाट आरक्षण आंदोलन हिंसक हो गया है। आंदोलनकारियों ने बसों को आग लगा दी जिसमें महिला व पुरुष पुलिसकर्मी के साथ कई मीडिया वाले थे, देखिए तस्वीरें...
जाट आरक्षण आंदोलन के तहत प्रदेश में पिछले 49 दिन से चले रहा शांतिपूर्ण आंदोलन रविवार को फतेहाबाद में हिंसक हो गया। फतेहाबाद से 38 किलोमीटर दूर स्थित गांव ढाणी गोपाल के पास आंदोलनकारियों और पुलिस व सुरक्षाबलों के बीच टकराव में फतेहाबाद एसपी ओपी नरवाल व डीएसपी गुरदयाल सिंह सहित 50 पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ जवान घायल हो गए। घायलों में एक महिला एसएचओ भी शामिल हैं।
उपद्रवियों ने पुलिस की दो बसें फूंक दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में लाठीचार्ज किया, जिसमें कुछ आंदोलनकारियों को भी चोटें लगी हैं। डीएसपी गुरदयाल सिंह के सिर पर भीड़ में शामिल लोगों ने कापे से वार किया है। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। उपद्रवियों ने मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों को भी बुरी तरह पीटा और बसों के साथ ही जिंदा जलाने का प्रयास किया। उनके कैमरे तोड़ दिए गए और मोबाइल छीन लिए।
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Jat Reservation movement
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले चलाए, लेकिन यह कवायद ज्यादा कारगर साबित नहीं हो सकी। फिलहाल हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। सुबह से ही धरनास्थल पर ट्रेक्टर ट्रालियों में भरकर आंदोलनकारियों के जत्थे पहुंचने शुरू हो गए थे। करीब पौने बारह बजे धरनास्थल के पास ही हिसार रोड पर डीएसपी गुरदयाल सिंह ने आंदोलनकारियों को पैदल ही जाने को कहा। इसी बात पर विरोध शुरू हो गया।
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हंगामा बढ़ा तो भीड़ में से किसी ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंक दिया। इस पर पुलिसकर्मियों लोगों को डंडों से फटकारने का प्रयास किया तो विवाद बढ़ गया। पत्थरबाजी होने लगी। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसी बीच एक युवक ने डीएसपी गुरदयाल के सिर में कापे से वार किया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी और मीडियाकर्मियों ने भागकर जान बचाई। इनमें कुछ लोग वहीं पर खड़ी पुलिस बस में घुस गए।