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विजय दिवसः अपनी लाइफ सेविंग जैकेट बावर्ची को देकर नेवी के कैप्टन ने दी थी शहादत, पढ़ें कहानी

Sun, 16 Dec 2018 11:40 AM IST
Priyesh Mishra मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Priyesh Mishra Updated Sun, 16 Dec 2018 11:40 AM IST
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Vijay Diwas, 1971 India Pakistan War, Bravery Story of Indian Navy Captain Mahendra Nath Mulla
कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला
1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान एक घटना ऐसी भी घटी थी, जिस पर आज भले ही पाकिस्तान वाहवाही लूटता है, लेकिन इस घटना ने पूरी दुनिया को भारतीय जांबाजों की शूरवीरता से रूबरू करवा दिया था। पढ़ें कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला की बहादुरी की कहानी।
Vijay Diwas, 1971 India Pakistan War, Bravery Story of Indian Navy Captain Mahendra Nath Mulla
कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला
नेवी के कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला की आईएनएस खुखरी की इस शहादत को हमेशा देश सलाम करता रहेगा। किस तरह उन्होंने अपने अन्य साथियों की जान बचाते हुए न केवल शहादत को गले लगाया, बल्कि जहाज पर सवार एक कैप्टन के दायित्व को भी बखूबी निभाया। इतना ही अपनी लाइफ जैकेट भी जहाज के बावर्ची को पहनाकर उसे भी पानी में धकेल दिया, ताकि उसकी जान भी बच जाए और आप खुद आईएनएस खुखरी के क्वार्टर डेक पर खड़े होकर शहादत का इस्तकबाल करने लगे।
Vijay Diwas, 1971 India Pakistan War, Bravery Story of Indian Navy Captain Mahendra Nath Mulla
कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला
विगत दिनों चंडीगढ़ में आयोजित मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट के दौरान युद्ध वार्ताकार मेजर जनरल आके कौशल ने इस वीरता की दास्तां से अवगत करवाया। मेजर जनरल आके कौशल ने बताया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सन 1971 में युद्ध छिड़ चुका था। अंदेशा था कि पाक नौसेना भी हरकत कर मुंबई बंदरगाह को निशाना बना सकती है। इसलिए नौसेना फ्लीट अरब सागर में सक्रिय हो गई।
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Vijay Diwas, 1971 India Pakistan War, Bravery Story of Indian Navy Captain Mahendra Nath Mulla
कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला
पाकिस्तान की पीएनएस हंगोर (पनडुब्बी) भारतीय नौसेना को निशाना बनाने भारतीय जल सीमा में घुस चुकी थी। उसके भेजे जा रहे संदेशों को भारतीय नौसेना ने टैप कर लिया और ये मालूम चल गया कि पाकिस्तानी पनडुब्बी भारतीय जल सीमा में ही घूम रही है। इसे नेस्तनाबूद करने के लिए नेवी ने अपनी एंटी सबमरीन आईएनएस खुखरी और कृपाण को तैनात किया। दोनों 8 दिसंबर को मुंबई से चले और 9 दिसंबर को उस इलाके  तक पहुंच गए, जहां पाकिस्तानी पनडुब्बी हंगोर के होने का अंदेशा था।
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Vijay Diwas, 1971 India Pakistan War, Bravery Story of Indian Navy Captain Mahendra Nath Mulla
कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला
हंगोर को भारतीय एंटी सबमरीनों के पहुंचते ही सबमरीन कृपाण पर टॉरपीडो (पनडुब्बी का गोला) दाग दिया। लेकिन निशाना चूक गया। उसके तुरंत बाद ही पाक पनडुब्बी हंगोर ने दूसरा टॉरपीडो एनआईएस खुखरी पर दाग दिया। खुखरी पर दो छेद हो चुके थे और जहाज डूबना शुरू हो गया था। कैप्टन मुल्ला ने सभी साथियों को जल्द से जल्द लाइफ सेविंग जैकेट पहनकर अरब सागर में कूदने को कहा। दो अफसर साथी मुल्ला को भी अपने साथ लेकर पानी में कूदना चाहते थे, लेकिन मुल्ला ने उन्हें फटाफट नीचे धकेल दिया।
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