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देखिए, देश की धरोहर संजोने के लिए बेच दी तीन करोड़ की जमीन और खुद अब किराये पर रहते हैं

Sat, 14 Dec 2019 01:47 PM IST
खुशबू गोयल रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रूबी सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 14 Dec 2019 01:47 PM IST
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Unique Collection by Mechanical Engineer Narendra Pal Regarding Sikh History and Indian Army
नरेंद्र पाल की अनोखी कलेक्शन - फोटो : अमर उजाला
इसे शौक कहें या जुनून, देश की धरोहर संजोने के लिए तीन करोड़ की जमीन बेच दी और अब खुद किराये के मकान में रहते हैं। पढ़िए, इस शख्स के जज्बे की अनोखी कहानी...
Unique Collection by Mechanical Engineer Narendra Pal Regarding Sikh History and Indian Army
मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में लगी प्रदर्शनी - फोटो : अमर उजाला
लुधियाना के मॉडर्न टाउन निवासी नरेंद्रपाल सिंह अपनी तीन करोड़ की जमीन को बेच चुके हैं और अब अपने घर को सिख इतिहास की धरोहर के लिए समर्पित करने जा रहे हैं। वे अब किराये के मकान में रहते है। देश के युवाओं को जवानों की वीरता और सिख धर्म के इतिहास से रूबरू कराने की यह कोशिश करते हुए उन्हें 30 साल हो गए हैं। अपनी जमीन और जमा राशि से वे अभी तक 80 हजार सिक्के खरीद चुके हैं, जिसमें वार मेडर्ल्स के ‘इंडीपेंडेंट्स मेडल 15 अगस्त 1947’, ‘इंडीपेंडेंट्स मेडल 26 जनवरी 1950’ ‘रक्षा मंडल’ विदेश सेवा मेडल, ’सैन्य सेवा मेडल एनआईएफए’, हिमाचल एवं जम्मू एंड कश्मीर सैन्य सेवा मेडल की कलेक्शन हैं।
Unique Collection by Mechanical Engineer Narendra Pal Regarding Sikh History and Indian Army
मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में लगी प्रदर्शनी - फोटो : अमर उजाला
मिलिट्री लिटेचर फेस्टिवल 2019 में उन्होंने भारतीय सेना की वीरता की झलक अपनी सिक्कों की कलेक्शन को डिस्पले करके दिखाई। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने भारतीय सेना की वीरता एवं देश की धरोहर को लेकर अपने सपनों को भी साझा किया। पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर नरेंद्र पाल का सपना है कि वे अपनी विरासत को म्यूजियम में रखकर इसे युवाओं के लिए डिस्पले करेंगे। वे इसके लिए अपने घर को म्यूजियम के तौर पर तैयार करने की योजना बना रहे हैं। वे यहां कुछ 50 हथियार 400 साल पुराने, 100 हस्तलिखित पांडुलिपियों और विभिन्न देशों के 80,000 से अधिक सिक्कों  के अलावा सिख शासन के नानकशी सिक्कों को डिस्पले करेंगे।
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Unique Collection by Mechanical Engineer Narendra Pal Regarding Sikh History and Indian Army
मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में लगी प्रदर्शनी - फोटो : अमर उजाला
नरेंद्र पाल का ऐसा करने का मकसद आने वाली पीढ़ी को अपनी विरासत के बारे में बताना है। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुके नरेंद्र पाल ने बताया कि वे जब आठवीं कक्षा में थे, तब उन्होंने ब्रिटिश शासन के सिक्के अपने दादा से लिए थे और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। विश्व में शंख व कौड़ियों की कुल 370 प्रजातियां हैं, जिनमें से 350 प्रजातियां उनके पास हैं। पुराने समय में कौड़ियों को पैसों के रूप में प्रयोग किया जाता था। उनके पास 10 हजार तरह के की-रिंग हैं। 10 हजार तरह की विस्की और शराब की बोतलें मौजूद हैं। 1935 से लेकर अब तक के विभिन्न प्रकार के कैमरे भी उनके पास मौजूद हैं।
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मिलिट्री लिटरेचर फेस्ट में लगी प्रदर्शनी - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि जवाहर लाल नेहरू के परिवार पर 30 देशों ने डाक टिकटें जारी की। ये सभी टिकटें भी उनके पास हैं। इसके अलावा माचिस, हथियारों, की-रिंग, ज्वैलरी और कैमरों का संग्रहण कर रहे हैं। वे अब तक 80 हजार सिक्कों का संग्रहण कर चुके हैं। सिक्कों की खोज में उन्होंने उत्तर भारत के सभी राज्यों हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू कश्मीर घूम चुके हैं। इसके अलावा वे सिक्कों की तलाश में पाकिस्तान भी गए। सिख रियासत के सभी काल के सिक्के उनके पास हैं। इन पर गुरुओं का नाम और फोटो होती है। सिख राजा जिस भी क्षेत्र को जीत लेते थे, वहां से सिक्का जारी करते थे।

 
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