चंडीगढ़ : कोरोना काल में इन महिलाओं ने निभाई अहम भूमिका, जज्बे की कहानी पढ़ आप भी करेंगे सलाम
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कोरोना जैसे संकट काल में मानवता की रक्षा के लिए जिन लोगों ने अहम भूमिका निभाई, उनमें महिलाओं की तादाद अच्छी-खासी रही है। महिलाओं को जो जिम्मेदारियां मिलीं, उसका उन्होंने अच्छे से निर्वहन किया और रोल मॉडल बनकर उभरीं। इनमें शामिल महिलाओं में से किसी ने टीकाकरण के ट्रायल की जिम्मेदारी संभाली तो किसी ने उन गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी करवाई, जो कोरोना पॉजिटिव थीं। एक नजर डालते हैं उन महिलाओं पर जिन्होंने कोरोना की लड़ाई को अपने जज्बे से आसान बना दिया।
कोरोना महामारी में 100 महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी करवाई
कोविड के दौरान पीजीआई के स्त्री एवं प्रसूति विभाग में कार्यरत कोरोना की नोडल ऑफिसर डॉ. भारती जोशी ने अपनी सूझबूझ से 100 से ज्यादा महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी करवाई। इसमें एक दर्जन से ज्यादा कोरोना पॉजिटिव गर्भवती महिलाएं भी शामिल थीं, जिनकी गोद में शिशु की किलकारी गूंजी। डॉ. भारती ने नोडल ऑफिसर की जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए ओपीडी में गर्भवती महिलाओं का इलाज भी किया।
पीजीआई में कोविड जांच की संभाली जिम्मेदारी
देश में जब कोरोना वायरस ने प्रवेश किया था तब देश के कुछ ही संस्थानों में कोरोना की जांच हो रही थी, उन्हीं में से एक लैब का जिम्मा पीजीआई के वायरोलॉजी विभाग की प्रोफेसर मिनी पी सिंह के पास था। 24 घंटे लगातार काम कर उनकी टीम ने न सिर्फ चंडीगढ़ बल्कि पंजाब, हरियाणा व हिमाचल के संदिग्ध मरीजों के नमूनों की जांच की। उत्तर भारत में 67 कोविड लैब की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनकी देखरेख में सैकड़ों कर्मचारियों को कोविड-जांच के लिए प्रशिक्षित किया गया।
वैक्सीन ट्रायल की जिम्मेदारी संभाली
पीजीआई की डॉ. मधु गुप्ता को कोरोना के लिए तैयार की गई वैक्सीन के मानव परीक्षण करने वाली टीम की प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया। सितंबर में शुरू किए गए ट्रायल में डॉक्टर मधु ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए स्वयंसेवकों के चयन की प्रक्रिया से लेकर उनको पहली खुराक दिए व तीसरे चरण के सफलतापूर्वक पूरा किए जाने में अहम भूमिका निभाई। इसके साथ ही शहर में शुरू हुए टीकाकरण अभियान के अंतर्गत डॉ. मधु पीजीआई की ओर से बनाए गए टीकाकरण केंद्र की देखभाल की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं।
कोरोना नियंत्रण की केंद्रीय टीम में शामिल रहीं
पीजीआई के सामुदायिक चिकित्सा विभाग की डॉ. लक्ष्मी ने कोविड-काल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए कोरोना कंट्रोल की केंद्रीय टीम में अपनी जगह बनाई। सितंबर में जब कोरोना चरम पर था तो भारत सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए एक केंद्रीय टीम बनाई, जिनमें डॉ. पीवीएम लक्ष्मी को बतौर इन्वेस्टिगेटर शामिल किया गया। अपनी जिम्मेदारियों को उन्होंने बखूबी निभाई और कोरोना को नियंत्रण करने में उनके सुझाव पर चंडीगढ़ प्रशासन ने काम किया और कोरोना को काबू किया।
कॉमिक्स निकालकर बच्चों को किया जागरूक
कोरोना व लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर बच्चों में देखा गया। उनके डर को दूर करने के साथ कोरोना वायरस और उससे बचाव के तरीके को सरल भाषा में समझाने का काम पंजाब यूनिवर्सिटी के पर्यावरण अध्ययन विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुमन मोर ने किया। उन्होंने कॉमिक्स की एक सीरीज प्रकाशित कराई, जो न सिर्फ देश में बल्कि विश्व के कई देशों में प्रसारित हुई। यह कॉमिक्स लोगों के मन से कोरोना के डर को निकालने और उन्हें सुरक्षित रखने में बेहद कारगर साबित हुई।