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1965 के युद्ध में एयरफोर्स ने कैसे तोड़ी थी पाक की कमर?

Tue, 01 Sep 2015 07:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 01 Sep 2015 07:55 AM IST
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1965 के युद्ध में एयरफोर्स ने कैसे तोड़ी थी पाक की कमर?

special story on 50 years of 1965 indo pak war

1965 के भारत-पाक युद्ध में इंडियन एयरफोर्स ने पाकिस्तानियों की कमर तोड़ दी थी। कैसे, बता रहे हैं वीर चक्र अवार्डी स्क्वाड्रन लीडर हमीर सिंह मंगत। रिपोर्टः आशीष वर्मा, चंडीगढ़

1965 के युद्ध में एयरफोर्स ने कैसे तोड़ी थी पाक की कमर?

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चंडीगढ़ में मनीमाजरा के रहने वाले हमीर सिंह बताते हैं कि उस युद्ध में इंडियर एयरफोर्स ने अहम भूमिका निभाई थी। उनके जेहन में आज भी उस समय लड़े गए युद्ध का एक-एक पल ताजा है। हमीर सिंह बताते हैं कि युद्ध पर जाने से पहले वे अपनी पत्नी हरबंश कौर को ब्लैंक चेक सौंप कर गए थे। उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वे युद्ध से वापस आएंगे या नहीं।

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हमीर स‌िंह ने बताया कि उस समय भारत को सूचना मिली कि पेशावर से पाकिस्तानी एयरफोर्स भारत में अटैक की प्लानिंग कर रही है। सूचना मिलते ही इंडियन एयरफोर्स एक्टिव हो गई। पाकिस्तानी इलाके की पूरी स्टडी की गई। इंडियन एयरफोर्स ने फैसला लिया कि पाकिस्तानी विमानों के उड़ने से पहले उनके रनवे और एयरक्राफ्ट को पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाए।

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वे बताते हैं कि इस काम की जिम्मेदारी विंग कमांडर पीपी सिंह को सौंपी गई। उस समय हमीर सिंह मंगत फ्लाई नेवीगेटर के रूप में थे। एयरक्राफ्ट में पायलट के साथ एक नेवीगेटर होता है। नेवीगेटर का काम दुश्मनों के रडार से बचाना और बटन दबाकर टारगेट पर बम फेंकना होता है।

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छह सितंबर को रात के वक्त आगरा से पाकिस्तान के लिए उड़ान भरी गई। फ्लाइट में हमीर सिंह के अलावा पायलट विंग कमांडर पीपी सिंह थे। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि तय तेल में दुश्मनों के ठिकानों को नष्ट कर वापस लौट आना।

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