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अटारी बार्डर पर 9 मार्च 2017 की रिट्रीट सेरेमनी बनीं यादगार, खुद देख लीजिए कैसे
ब्यूरो/अमर उजाला, अटारी बार्डर(पंजाब)
Updated Fri, 10 Mar 2017 06:04 PM IST
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अटारी बार्डर पर यादगार बनी आज की रिट्रीट सेरेमनी
- फोटो : अमर उजाला
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अटारी बार्डर पर आज की यानि 9 मार्च की रिट्रीट सेरेमनी यादगार बन गई। यकीं नहीं होता तो खुद देखिए...
अटारी बार्डर पर यादगार बनी आज की रिट्रीट सेरेमनी
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, अटारी बार्डर पर देश का सबसे ऊंचा (360 फुट) फहरा रहे तिरंगे में चार इंच नुकसान पहुंचा तो आनन-फानन में बरसात के बीच तिरंगे को सम्मान के साथ रिट्रीट सेरेमनी के दौरान तब उतारा गया जब भारत-पाकिस्तान के बीच अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज उतारने के लिए एक साथ धुन बजती है। लिम्का बुक आफ वल्ड रिकार्ड में यह भी रिकार्ड दर्ज हो सकता है कि भारत का सबसे ऊंचे तिरंगे को सम्मान के साथ उतारने के लिए पाकिस्तान ने 9 मार्च 2017 को धुन बजाई थी।
अटारी बार्डर पर यादगार बनी आज की रिट्रीट सेरेमनी
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खास बात है कि पाकिस्तान को पता ही नहीं चलने दिया गया कि भारत का सबसे ऊंचा तिरंगा को क्षति पहुंची है और उसे उतार कर दोबारा नया फहराया जाना है। देश का सबसे ऊंचे तिरंगे को अटारी बार्डर पर फहराने में भले ही पाकिस्तान ने चार मार्च को एतराज जताया था पर उसी तिरंगे को जब नुकसान पहुंचने पर सम्मान के साथ उतारा जा रहा था तो पाकिस्तान भी धुन बजा रहा था।
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अटारी बार्डर पर यादगार बनी आज की रिट्रीट सेरेमनी
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हुआ यूं कि सुबह तेज आंधी के चलते 360 फुट ऊंचे तिरंगे में करीब चार इंच नुकसान पहुंचा था। ऐसे में तय किया गया कि जब भारत-पाकिस्तान के बीच रिट्रीट सेरेमनी होगी और दोनों देशों के ध्वज उतारे जाएंगे तभी तिरंगा को उतार कर दूसरा तिरंगा फहरा दिया जाएगा। क्योंकि तिरंगे को सम्मान से उतारने के लिए यही विकल्प था। ऐसे में 11 इंजीनियरों की टीम व छह पावरकाम के अधिकारियों ने देश के सबसे ऊंचे तिरंगे को बदल कर नया तिरंगा फहरा दिया।
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अटारी बार्डर पर यादगार बनी आज की रिट्रीट सेरेमनी
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इस दौरान एसडीओ हरिंदर सिंह व इंजीनियर कुलदीप सिंह ने टीम की अगुवाई की। तिरंगा को नुकसान पहुंचने की खबर सुबह ही सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों ने बीएसएफ को दे दी थी। तिरंगा को सम्मान से उतारने व नया तिरंगा फहराने के लिए सारी तैयारी सुबह से चल रही थी।