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क्या है डेरा सच्चा सौदा और कैसे हुई स्थापना, जानिए शुरू से अब तक पूरी कहानी...
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 09 Sep 2017 09:20 AM IST
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राम रहीम का डेरा सच्चा सौदा
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करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक सिरसा डेरा सच्चा सौदा क्या है और इसकी स्थापना कैसे हुई। जानिए इसकी और इसके अब तक के प्रमुखों की पूरी कहानी...
राम रहीम का डेरा सच्चा सौदा
डेरा सच्चा सौदा (डीएसएस) एक सामाजिक कल्याण एवं आध्यात्मिक संगठन है, जिसकी स्थापना मस्ताना बलूचिस्तानी नामक एक साधु ने 29 अप्रैल 1948 को एक आध्यात्मिक शिक्षा केंद्र के रूप में की थी। हरियाणा के सिरसा में डेरे का मुख्यालय है। देशभर में इसके कुल 46 आश्रम हैं। अमेरिका, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन समेत कई देशों में इसके कई केंद्र हैं। डेरा सच्चा सौदा के विश्वभर में करीब 6 करोड़ अनुयायी हैं।
Ram Rahim
डेरा की स्थापना करने वाले बाबा मस्ताना बलूचिस्तानी को उनके समर्थक बेपरवाह मस्तानाजी महाराज के नाम से बुलाते थे। बाबा मस्ताना बलूचिस्तानी का 18 अप्रैल 1960 को निधन हो गया, जिसके बाद 25 जनवरी 1919 को जन्मे बाबा शाह सतनाम सिंह ने 41 वर्ष की उम्र में डेरा प्रमुख का पद संभाला। शाह सतनाम सिंह 1990 तक डेरा प्रमुख रहे। 13 दिसम्बर 1991 को उनका निधन हो गया। इसके बाद 23 सितंबर 1990 को गुरमीत राम डेरा सच्चा सौदा के तीसरे प्रमुख बने।
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डेरे ने गुरमीत राम रहीम सिंह के कार्यकाल में तरक्की की। डेरा का विस्तार गांव नेजिया तक हुआ। आज डेरा किसी मिनी कंट्री से कम नहीं है। डेरा सच्चा सौदा ट्रस्ट ही डेरा का संचालन करता है। इसके आधीन डेरा प्रबंध कमेटी कार्य करती है। डेरा कमेटी में ग्राम पंचायत स्तर पर भंगीदास होते हैं जो देखभाल करते हैं। वह डेरा से मिले दिशा निर्देश को नामचर्चा के दौरान श्रद्धालुओं तक पहुंचाते हैं।
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भंगीदास के के ऊपर सात मेंबर कमेटी, उसके बाद 15, इसके बाद 25 और प्रदेश स्तर पर 45 मेंबर कमेटी होती हैं। ये सभी कमेटियां आपस में तालमेल रखते हुए कार्य करती हैं। हर कमेटी के कार्य की रिपोर्ट डेरा प्रमुख तक पहुंचाई जाती थीं, अच्छा कार्य करने वालों को सत्संग में ट्रॉफी देकर सम्मानित किया जाता था। महिलाओं के लिए गठित कमेटी में शामिल महिलाओं को सुजान बहने कहा जाता था।