देश भर की महिलाओं के लिए चाइल्ड केयर लीव से जुड़ा बेहद अहम फरमान जारी किया गया है और इस तरीके से ही लीव मंजूर हुआ करेगी, जरूर पढ़ें।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महिला कर्मियों की चाइल्ड केयर लीव को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व मंजूरी के चाइल्ड केयर लीव नहीं ली जा सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह छुट्टियां महिला कर्मियों का अधिकार हैं, लेकिन इसके लिए पूरे वेतन का भुगतान होता है इसलिए पूर्व मंजूरी जरूरी है।
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नवजात शिशु
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मामला हरियाणा सरकार के आधीन कार्यरत महिला कर्मी से जुड़ा है। महिला कर्मी ने 30 नवंबर 2010 से 31 मार्च 2011 तक अवकाश लिया था। 6 अप्रैल 2011 को महिला कर्मी ने इसे चाइल्ड केयर लीव के तौर पर मंजूर करने के लिए आवेदन किया था।
हरियाणा सरकार ने इस आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए महिला कर्मी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जस्टिस आरएन रैना ने महिला कर्मी की याचिका को खारिज करते हुए हरियाणा सरकार के फैसले पर मुहर लगा दी।
जस्टिस रैना ने अपने फैसले में कहा कि महिला कर्मी को पूरे सेवा काल में 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव का अधिकार है। इस अवधि का सरकार को पूरा वेतन देना होता है। इस वजह से यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि इसके लिए पूर्व में आवेदन किया जाए और मंजूरी मिलने के बाद ही चाइल्ड केयर लीव के रूप में जोड़ा जा सकता है।