रियो ओलंपिक में देश को पदक जिताने वाली पहलवान साक्षी मलिक के लिए कई मुश्किलें खड़ी होने वाली हैं, क्योंकि एक मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
दरअसल, हरियाणा की बेटी सरिता मोर को एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में 60 की जगह 58 किलोवर्ग में खिलाने का मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है। फेडरेशन ने साक्षी मलिक के चक्कर में सरिता की वेट श्रेणी दो दिन पहले बदल दी थी। प्रदेश के खेल मंत्री अनिज विज ने पूरे मामले में खेल निदेशक से विस्तृत रिपोर्ट मांगने का निर्णय लिया है। हालांकि, विज को मामले की पूरी जानकारी नहीं है।
विज ने कहा कि खेल निदेशक से रिपोर्ट लेने के बाद ही वह आगामी कार्रवाई को लेकर कुछ कह पाएंगे। इससे साफ है कि रिपोर्ट में फेडरेशन की गलती पाए जाने पर दोषियों का नपना तय है। चूंकि सरिता को दो दिन पहले फैसला सुनाने की चलते काफी दिक्कत हुई और वजन कम करने के लिए 24 घंटे भूखा तक रहना पड़ा। कम किलोवर्ग में खिलाने का असर पदक के रंग पर भी पड़ा और वह गोल्ड के बजाय सिल्वर ही जीत पाईं।
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ग्लैमरस हो गई है ये ओलंपियन पहलवान
वजन घटाने को लेकर 24 घंटे भूखी रही, उल्टियां भी हुईं। अगर अपनी वेट कैटेगरी में खेलती तो देश को सोना दिलाती। एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में देश को सिल्वर मेडल दिलाने के बाद सरिता ने अपने दिल की बात कही। एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप के लिए जिस तरह ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मलिक के लिए फेडरेशन ने सरिता की मेहनत को दरकिनार करते हुए अचानक 58 किलो में खेलने का फैसला सुनाया।
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एशियन रेस्लिंग चैंपियनशिप
- फोटो : SELF
इस पर अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं। चैंपियनशिप शुरू होने से दो दिन पहले ही वेट कैटेगरी बदलने से उसका सारा ध्यान प्रैक्टिस छोड़कर वजन कम करने पर आ गया। कहा जा रहा है कि सरिता अपने वेट में लड़ती तो वह देश को गोल्ड दिला सकती थी। पहलवान सरिता मोर ने एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप के लिए 60 किलो भार वर्ग में क्वालिफाई किया था और नियमित प्रैक्टिस कर रही थी।