कर्म का अमर संदेश देने वाले पवित्र ग्रंथ गीता के 5153वें जन्मोत्सव पर भारत रत्न तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भले एक घटना के कारण हरियाणा के कुरुक्षेत्र न पहुंच सके हों, मगर इससे पहले के आगमन को शक्तिपीठ भद्रकाली अमर बनाने जा रहा है। इस शक्तिपीठ में प्रणब मुखर्जी देश के दूसरे राष्ट्रपति थे, जिन्होंने युगों पुरानी परंपरा को चांदी के घोड़े चढ़़ा कर निभाया था।
प्रणब दा के चांदी के घोड़े भद्रकाली शक्तिपीठ में होंगे स्थापित, इस पीठ से है परिवार का खास नाता
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शक्तिपीठ में प्रणब मुखर्जी द्वारा अर्पित घोड़े अब दरबार परिसर में स्थायी रूप से स्थापित किए जाएंगे। भारत रत्न प्रणब मुखर्जी की निधन की सूचना मिलने पर शक्तिपीठ के पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने अमर उजाला को यह जानकारी देते हुए शोक प्रकट किया। उन्होंने कहा कि भारत ने आज अपना एक कर्मयोगी सपूत खो दिया है।
बता दें कि पीठाध्यक्ष 11 अगस्त को ही दिल्ली में उनके पुत्र अभिजीत मुखर्जी और परिवार के सदस्यों को मिलकर कुशलक्षेम लेने और मां भद्रकाली शक्तिपीठ में प्रणब मुखर्जी के स्वास्थ्य लाभ के लिए कराये गए विशेष अनुष्ठान के दौरान पहुंचे थे। दिवंगत भारत रत्न प्रणब मुखर्जी से धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की कई यादें जुड़ी हैं। शक्तिपीठ के अलावा कुरुक्षेत्र के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में भी उनकी मौजूदगी अलग-अलग कार्यक्रमों में रही है। वहीं, 2016 में एक ऐसा अवसर भी बना जब वे वर्चुअली तौर पर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र से जुड़े और अपना संदेश दिया।
दूसरा दौरा रद्द हुआ तो प्रणब दा के पुत्र ने निभाई परंपरा
6 दिसंबर 2016 को कुरुक्षेत्र में बतौर राष्ट्रपति दूसरी बार प्रणब मुखर्जी का आगमन होना था लेकिन उसी दिन तमिलनाडु की सीएम जयललिता के निधन के चलते वे कुरुक्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों शिरकत नहीं कर सके। हालांकि कुरुक्षेत्र के शक्तिपीठ भद्रकाली मंदिर में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के तत्कालीन सांसद पुत्र एवं भारतीय इस्पात के पूर्व निदेशक रहे अभिजीत मुखर्जी ने पूरे विधिविधान से पूजा अर्चना की थी और दूसरी बार पिता की ओर से चांदी के घोड़े उनके पुत्र ने चढ़ाए। बेशक अभिजीत मुखर्जी 6 दिसंबर को पहली बार आए थे, मगर इसके बाद वे अनेक बार शक्तिपीठ आए और यहां पूजा अर्चना की।
प्रणब दा नहीं आए और ब्रह्मसरोवर पर आज भी वो दीवार...
छह दिसंबर 2016 को ही तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा पहले अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का शुभारंभ करना था। गीता जी की 5153 वीं इस जयंती पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर के समारोह का उद्घाटन के साथ-साथ ब्रह्मसरोवर के पुरुषोत्तमपुरा बाग में 100 करोड़ रुपये के कृष्णा सर्किट परियोजना का उद्घाटन भी उन्हीं के हाथों से होना था लेकिन उसी दिन मुख्यमंत्री जयललिता का निधन हो गया था। जिसकी वजह से आज भी वह उद्घाटन स्थल बगैर पत्थर के खाली खड़ा है। केडीबी की योजना थी कि फिर किसी खास मौके पर इस जगह उन्हीं के हाथों से किसी योजना का उद्घाटन या शिलान्यास कराया जाएगा, मगर पूरी इच्छा अधूरी रह गई।