रेलवे यात्रियों से पांच सौ और हजार रुपये के नोट स्वीकार तो कर रहा है, लेकिन बिना छोटे नोट दिए टिकट नहीं मिल रहे हैं। हजार और पांच सौ के नोट देने पर इंतजार करने को कहा जाता है। ऐसे में यात्री को या तो सौ रुपये की यात्रा पांच सौ में करनी पड़ रही है या बिना टिकट यात्रा करनी पड़ रही है।
500/1000 के चक्कर में 'प्रभु' की रेल में हो रही लोगों की चांदी, मिल रहा बड़ा फायदा
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इस वजह से जनरल टिकट काउंटर पर शुक्रवार को भी मारामारी रही। जबकि आरक्षित टिकट को रद्द कराने पर पैसा वापसी का नियम सख्त होने के बाद रिजर्वेशन काउंटर पर स्थिति सामान्य हो गई है। रेलवे की जरनल बोगी में सफर करना इन दिनों आसान नहीं रह गया है। एक तो सीट कम, ऊपर से टिकट के लिए छुट्टे पैसे देना जरूरी हो गया है। यदि फुटकर पैसे नहीं देंगे तो बकाया पैसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
इस चक्कर में गाड़ी रवाना हो जाएगी और बकाया राशि नहीं मिलेगी। ईआरसी रमेश मलिक की माने तो पूरे दिन महज 40 से 50 ही छोटे नोट आते हैं। जबकि 500 और 1000 रुपये के नोटों की संख्या अधिक होती है। ऐसे में कितने यात्रियों को छुट्टे पैसे दिए जा सकते हैं।
बगैर टिकट हो रही यात्रा- रेलवे यात्री इन दिनों बगैर टिकट यात्रा कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि यदि वह टिकट लेते हैं तो 500 रुपये फंसते हैं। यदि बिना टिकट पकडे़ जाते हैं तो जुर्माना 250 रुपये है। जबकि पकडे़ जाने की आशंका इन दिनों न के बराबर है। बगैर टिकट यात्रा करने वालों की संख्या इन दिनों काफी है। जांच टीम के पास भी छुट्टा नहीं होने की वजह से वह भी बच रही है।
आरक्षित टिकट के निरस्तीकरण का निकाला तोड़- बड़े नोट स्वीकार करने के रेलवे में छूट की शुरूआत में लोगों ने जमकर फायदा उठाया तो रेलवे ने नियम सख्त कर दिए। अब रेलवे स्टेशन पर 500 और 1000 रुपये के नोट चलाना आसान नहीं रह गया है। अधिकारियों ने ऐसी व्यवस्था बना दी है कि उसे भेद पाना मुश्किल है। यदि कोई यात्री टिकट रद्द करवाता है और कहता है कि उसे पुराने नोट दे दिए जाएं तो उसे राशि लौटा दी जाती है। यदि वह नई करेंसी या छोटे नोट मांगता है तो उसे रेलवे डिपोजिट सीटीआर दे देता है। इससे यात्री के पते पर 10 से 15 दिन में पे आर्डर जाएगा और वह टिकट जमा करवा कर पैसे ले सकेगा। राशि यदि 10 हजार से अधिक हुई तो उसे सीधे यात्री के बैंक अकाउंट में भेजा जाएगा।