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साक्षी के पिता बोले, बेटी के पहलवान बनने पर उठे थे सवाल, अब कोई नहीं बोलेगा
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:10 AM IST
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साक्षी मलिक
- फोटो : Amar ujala
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12 साल पहले जब बेटी ने पहलवान बनने की इच्छा जताई थी तो बिरादरी के लोगों ने कई सवाल उठाए थे। अब सभी सवाल खत्म हो जाएंगे।
sakshi malik father
ये कहना था साक्षी का पिता सुखबीर मलिक का। दिल्ली परिवहन निगम में कंडक्टर सुखबीर के मुताबिक 3 सितंबर 1992 को जन्मीं साक्षी ने मलिक ने महज 12 साल की उम्र में कुश्ती शुरू कर दी थी। साक्षी मलिक जब बड़ी हो रही थीं तो लोग उनके परिवार को कहते थे कि बेटी को पहलवानी ना सिखाएं क्योंकि उससे उनके कान बड़े हो जाएंगे और फिर शादी नहीं होगी। पहलवानों में कान बड़े हो जाना आम बात है।
Sakshi Malik mother
हरियाणा के रोहतक जिले के मोखरा गांव की रहने वाली साक्षी के रियो ओलिंपिक में पदक जीतते ही अखाड़े में उतरने के फैसले पर बिरादरी के लोगों का विरोध झेलने वाले उनके पिता सुखबीर मलिक का सीना आज फख्र से चौड़ा है और उन्होंने कहा कि अब उनसे कोई नहीं कहेगा कि लड़कियां पहलवानी करती अच्छी नहीं लगतीं। साक्षी के पदक के बाद और भी लड़कियां अखाड़े में उतरेंगी, ऐसा हमें भरोसा है।'
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साक्षी मलिक
- फोटो : PTI
सुखबीर ने कहा, 'हम सभी ने रात में पूरा बाउट देखा। क्वॉर्टर फाइनल में हारने के बाद भी हमें यकीन था कि वह रेपेचेज में जरूर जीतेगी। वह हमारे भरोसे पर खरी उतरी और हमारा नाम रोशन किया।' मां सुदेश मलिक ने कहा कि साक्षी से मंगलवार शाम को बात हुई थी। उसने बताया था कि मैं मेडल लेकर आऊंगी, लेकिन मैंने कहा कि बेटा, तुम्हें मेडल के लिए नहीं खेलना। जीत के लिए दांव लगाने हैं। मेडल तो अपने आप आ जाएगा।
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साक्षी मलिक
- फोटो : PTI
ऋषिकेश से नीलकंठ तक पैदल जाएंगे पिता: उधर, जीत के बाद साक्षी के पिता सुखबीर मलिक ने कहा, "उसका पहला ओलिंपिक है और उसने देश के लिए मेडल जीतकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। मैं अपनी मन्नत के अनुसार ऋषिकेश से 32 किलोमीटर दूर नीलकंठ महादेव मंदिर तक पैदल जाऊंगा। जब उनकी बेटी वापस लौटेगी तो मोखरा गांव से लेकर रोहतक सेक्टर 3 तक उसका जोरदार स्वागत किया जाएगा।