लंबे समय से सियासत से दूर और चुप्पी साधे हुए नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर पंजाब की राजनीति गर्म हो गई है। जहां एक ओर कांग्रेस ने दिल्ली चुनाव के लिए 40 स्टार प्रचारकों की सूची में सिद्धू को जगह दी है तो वहीं दूसरी ओर पंजाब की एक पार्टी सिद्धू को अपने पाले में लाने की जुगत में लगी हुई है। पार्टी ने ये भी एलान कर दिया है कि अगर सिद्धू साथ आते हैं तो वे विधानसभा चुनाव में सीएम चेहरा भी होंगे। हालांकि अभी भी नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से कोई बयान नहीं आया है। आइए जानते हैं पूरा मामला...
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नवजोत सिंह सिद्धू।
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पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (बादल) से अलग होकर एक पार्टी बनी। जिसका नाम शिअद (टकसाली) है। ये पार्टी लगातार सिद्धू को अपने पाले में लाने की कोशिश में लगी हुई है। इसी पार्टी के नेताओं ने पंजाब में बादल परिवार के वर्चस्व को समाप्त करने के लिए पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को अपने साथ लाने की नई मुहिम शुरू की है। टकसाली नेताओं ने सिद्धू को अपने साथ लाने के लिए पूर्व सांसद डॉ. रतन सिंह अजनाला को जिम्मेदारी सौंपी है।
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नवजोत सिंह सिद्धू (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
डॉ. अजनाला और नवजोत सिद्धू के बीच गहरी दोस्ती रही है। शिअद (टकसाली) के महासचिव सेवा सिंह सेखवां के अनुसार उन्होंने नवजोत सिद्धू को अपने साथ आने का न्योता भेजा है। शिअद (टकसाली) पंथक नेताओं के साथ-साथ पंजाब हितैषी नेताओं के साथ संपर्क स्थापित करने का अभियान शुरू करने जा रही है। सेखवां ने कहा यदि नवजोत सिद्धू उनके साथ आते हैं तो टकसाली नेता उनके घर नंगे पांव जाएंगे और आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में पेश करेंगे।
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Navjot Singh Sidhu
- फोटो : फाइल फोटो
सेखवां ने कहा कि अकाली दल को पुनर्जीवित करने के लिए एक सैद्धांतिक राजनीतिक लड़ाई शुरू हो चुकी है। सुखदेव ढींढसा की अगुवाई में सभी पंथक नेता एक प्लेटफॉर्म पर इकट्ठे होना शुरू हो चुके हैं। शिअद (टकसाली) के अध्यक्ष जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू के साथ बातचीत चल रही है। सिद्धू टकसाली अकाली दल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। डॉ. रतन सिंह अजनाला और सेवा सिंह सेखवां सिद्धू के संपर्क में हैं।
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Navjot Singh Sidhu
- फोटो : फाइल फोटो
ब्रह्मपुरा ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर बादल ने वोट किया था। भाजपा केंद्रीय नेतृत्व हरसिमरत को केंद्रीय मंत्रिमंडल से निकाल दे तो सुखबीर उसी समय पंजाब में भाजपा से नाता तोड़ देंगे। ब्रह्मपुरा ने दावा किया कि पंजाब में अकाली-भाजपा का समझौता अधिक दिन नहीं चलेगा। भाजपा प्रदेश में किसी अन्य राजनीतिक पार्टी के साथ समझौता करेगी। भाजपा को यह बात पता है कि पंजाब में वह अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं है।