यूं तो भगवंत मान अपनी कॉमेडी के लिए पहचाने चाहते हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के सांसद के रूप में उनकी हरकतें उन्हें गंभीर विवादों में डाल देती है।
स्टैंड-अप कॉमेडियन से राजनीतिज्ञ बने मान पंजाब में अभी भी सबसे लोकप्रिय चेहरा बने हुए हैं। वे सांसद तो हैं ही, अब उन्हें पंजाब आप का प्रदेश प्रधान भी बना दिया गया है। पर इसके लिए अरविंद केजरीवाल ने उनके सामने शराब छोड़ने की शर्त रखी है। सिर्फ शराब पीने का मामला ही नहीं, भगवंत मान कई तरह के विवादों में घिरते रहे हैं। कभी बयानों के कारण तो कभी हरकतों के कारण, जैसे विवादों से कोई पुराना नाता रहा हो।
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सीएम उम्मींदवार पर बोले भगवंत
- फोटो : अमर उजाला
रियलिटी शो ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज में देशभर में पहचान पाने के बाद वे 2011 में मनप्रीत सिंह बादल की पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब में आकर सक्रिय राजनीति में आए थे। वे 2012 में लेहरागागा से असेंबली सीट नहीं जीत पाए, लेकिन जब मार्च 2014 में आम आदमी पार्टी ज्वॉइन की उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2014 से वे लोकसभा सदस्य हैं।
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सीएम उम्मींदवार पर बोले भगवंत
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इससे पहले 2011 में जब उन्होंने अपनी पत्नी से तलाक लिया था, उन्होंने फेसबुक के जरिए कहा था कि पंजाब की सेवा के लिए वह पत्नी को छोड़ रहे हैं। सोशल मीडिया में इस तरह से राजनैतिक फायदे के लिए व्यक्तिगत मुद्दे को उछालने के लिए इस सांसद की खिंचाई हुई थी।2014 में ही सरकारी शिक्षकों की नकल करने वाले मान के वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया हासिल हुई थी।
जुलाई 2014 में भगवंत मान पर घमंडी होने और सुनाम को नजरअंदाज करने के आरोप लगे। इसके पर भगवंत मान के बयान से वर्कर तिलमिला उठे। भगवंत मान ने बयान दिया है कि बगावत का झंडा बुलंद करने वाले लोगों ने पार्टी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया था। मान के इस बयान से पार्टी वर्करों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया। वर्करों ने कहा कि भगवंत मान इन आरोपों को साबित करें या फिर सामूहिक तौर पर माफी मांगें।