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खास उपकरण : न दुश्मन बचेगा न मिलावटखोर.. चंडीगढ़ के वैज्ञानिकों ने कर दिया कमाल
Mon, 22 Mar 2021 02:51 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 22 Mar 2021 02:51 PM IST
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सीएसआईओ पहुंचे डॉ. हर्षवर्धन।
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ की सेंट्रल साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट आर्गनाइजेशन (सीएसआईओ) में वैज्ञानिक लगातार नए शोध कर रहे हैं। यहां देश की रक्षा से लेकर मिलावटखोरी से बचाव तक के उपकरण तैयार किए जा रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्यमंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने सेक्टर-39 स्थित इमटेक (इंस्टीट्यूट फॉर माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी) में बायो इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया है। इस दौरान डॉ. संजीव खोसला, निदेशक इमटेक ने सेंटर की खूबियों के बारे में बताया। इसके बाद स्वास्थ्यमंत्री सेक्टर-30 स्थित सीएसआईओ पहुंचे और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर इंटेलिजेंस सेंसर्स प्रयोगशाला का शुभारंभ किया। सीएसआईओ की प्रयोगशाला के बारे में बताया कि संस्थान कई तरह के सेंसर का निर्माण कर रहा है, जो देश की सुरक्षा में अहम योगदान दे रहे हैं। वहीं, संस्था के वैज्ञानिकों ने बताया कि देश की सीमा पर अलग-अलग तरह के सेंसर लगाए गए हैं, जो अलार्म आदि के जरिए संकेत देते हैं लेकिन अलार्म के बार-बार बजने से दुश्मन भी सचेत हो जाते हैं। ऐसे में संस्था सेंसर ऐसे तैयार करेगी, जो किसी व्यक्ति के आने, टैंक या गोला, बारूद आदि के आने पर ही बजेंगे। केंद्रीय मंत्री ने सीएसआईओ की ओर से बनाए गए उपकरणों का निरीक्षण किया और उनकी खूबियां जानीं। सीएसआईओ और पेक ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जो रिसर्च आदि के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे।
सीएसआईओ में बनाया गया एयरक्राफ्ट की लैंडिंग में मदद करने वाला उपकरण।
- फोटो : अमर उजाला
एयरक्रॉफ्ट की ऐसी लाइटें बनाईं, जो लगातार 20 हजार घंटे तक जलेंगी
सीएसआईओ के वैज्ञानिक डॉ. विनोद करार समेत अन्य वैज्ञानिकों ने मिलकर एयरक्रॉफ्ट की विशेष लाइटें तैयार की हैं। अब तक एयरक्रॉफ्ट की लाइटें दो हजार वाट की होती थीं। यह लाइटें 500 वाट की हैं लेकिन यह लगातार 20 हजार घंटे तक रोशनी दे सकेंगी। इन पर 25 लाख रुपये का खर्च आया है। हवा में ही ईंधन भरने के दौरान एयरक्राफ्ट की लाइटों का प्रयोग होता है। यह लाइटें एयरक्राफ्ट का तापमान भी सामान्य बनाए रखने में मदद करेंगी। 400 फुट तक इनकी रोशनी में साफ देखा जा सकेगा। इसके अलावा वैज्ञानिकों की टीम ने सुखोई समेत अन्य विमानों में प्रयोग की जाने वाले हेड ऑफ डिसप्ले तैयार की हैं। एक डिसप्ले को तैयार करने में दस साल का समय लगा और बाकी डिसप्ले में दो साल लगे। यह मोटे कांच के बने हैं।
सीएसआईओ के वैज्ञानिक डॉ. विनोद करार समेत अन्य वैज्ञानिकों ने मिलकर एयरक्रॉफ्ट की विशेष लाइटें तैयार की हैं। अब तक एयरक्रॉफ्ट की लाइटें दो हजार वाट की होती थीं। यह लाइटें 500 वाट की हैं लेकिन यह लगातार 20 हजार घंटे तक रोशनी दे सकेंगी। इन पर 25 लाख रुपये का खर्च आया है। हवा में ही ईंधन भरने के दौरान एयरक्राफ्ट की लाइटों का प्रयोग होता है। यह लाइटें एयरक्राफ्ट का तापमान भी सामान्य बनाए रखने में मदद करेंगी। 400 फुट तक इनकी रोशनी में साफ देखा जा सकेगा। इसके अलावा वैज्ञानिकों की टीम ने सुखोई समेत अन्य विमानों में प्रयोग की जाने वाले हेड ऑफ डिसप्ले तैयार की हैं। एक डिसप्ले को तैयार करने में दस साल का समय लगा और बाकी डिसप्ले में दो साल लगे। यह मोटे कांच के बने हैं।
चंडीगढ़ में हाथियों को ट्रैक करने वाला उपकरण देखते डॉ. हर्षवर्धन।
- फोटो : अमर उजाला
पानी में 25 किमी दूर दुश्मन की भी तस्वीर हो जाएगी कैद
सीएसआईओ ने एक डिजिटल हैलोग्राफी कैमरा तैयार किया है। इस कैमरे की खासियत यह है कि यह पानी के अंदर 25 किमी दूर मौजूद दुश्मन को भी कैद कर लेगा। यह कैमरा चारों ओर से सभी दृश्यों को कैद करके दो मिनट में परिणाम सामने रख देता है। पानी के जहाज के अंदर इसका प्रयोग होता है। अब तक ऐसा कैमरा भारत के पास नहीं था।
सीएसआईओ ने एक डिजिटल हैलोग्राफी कैमरा तैयार किया है। इस कैमरे की खासियत यह है कि यह पानी के अंदर 25 किमी दूर मौजूद दुश्मन को भी कैद कर लेगा। यह कैमरा चारों ओर से सभी दृश्यों को कैद करके दो मिनट में परिणाम सामने रख देता है। पानी के जहाज के अंदर इसका प्रयोग होता है। अब तक ऐसा कैमरा भारत के पास नहीं था।
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चंडीगढ़ के वैज्ञानिकों द्वारा बनाया उपकरण
- फोटो : अमर उजाला
चावल के हर दाने की गुणवत्ता बताएगा सॉफ्टवेयर
सीएसआईओ की तकनीकी अधिकारी ममता शर्मा ने राइस ग्रेन एनालिसिस सॉफ्टवेयर तैयार किया है। यह चावल के हर दाने की गुणवत्ता बताएगा। चावल का आकार, टूटे हुए चावल कितने हैं, कितने चावल ठोस हैं, आदि के बारे में जानकारी मिल जाएगी। इसके जरिए किसान अपने चावल का मूल्य निर्धारित कर सकेंगे। राइस मिलर्स को इसका अधिक लाभ मिलेगा। इसके लिए आठ लाइसेंस बनाए गए हैं। अन्य फसलों की गुणवत्ता भी ऐसे ही पता लगेगी। उसके लिए काम चल रहा है।
सीएसआईओ की तकनीकी अधिकारी ममता शर्मा ने राइस ग्रेन एनालिसिस सॉफ्टवेयर तैयार किया है। यह चावल के हर दाने की गुणवत्ता बताएगा। चावल का आकार, टूटे हुए चावल कितने हैं, कितने चावल ठोस हैं, आदि के बारे में जानकारी मिल जाएगी। इसके जरिए किसान अपने चावल का मूल्य निर्धारित कर सकेंगे। राइस मिलर्स को इसका अधिक लाभ मिलेगा। इसके लिए आठ लाइसेंस बनाए गए हैं। अन्य फसलों की गुणवत्ता भी ऐसे ही पता लगेगी। उसके लिए काम चल रहा है।
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चंडीगढ़ में एक वैज्ञानिक से बात करते डॉ. हर्षवर्धन।
- फोटो : अमर उजाला
दो सेकेंड में पता चलेगा तेल में कितनी मिलावट
सीनियर तकनीकी अधिकारी अनुपमा ने प्रिसिजन आयोडीन वैल्यू एनेलाइजर तैयार किया है। इसके जरिए तेलों में मिलावट का दो सेकेंड में पता लग जाएगा। तेल की आयोडीन वैल्यू के बारे में यह मशीन बता देगी। बता दें कि आजकल खाद्य पदार्थों में तेजी से मिलावट हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए यह मशीन तैयार की गई है। आयोडीन वैल्यू का पैमाना अलग-अलग तैयार किया गया है।
सीनियर तकनीकी अधिकारी अनुपमा ने प्रिसिजन आयोडीन वैल्यू एनेलाइजर तैयार किया है। इसके जरिए तेलों में मिलावट का दो सेकेंड में पता लग जाएगा। तेल की आयोडीन वैल्यू के बारे में यह मशीन बता देगी। बता दें कि आजकल खाद्य पदार्थों में तेजी से मिलावट हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए यह मशीन तैयार की गई है। आयोडीन वैल्यू का पैमाना अलग-अलग तैयार किया गया है।