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कल आने का किया था वादा...पर तिरंगे पर लिपट आज आया बेटा, पढ़ें- शहादत की गौरवगाथा

Tue, 01 Sep 2020 01:46 AM IST
ajay kumar अमित मरवाहा, तरनतारन (पंजाब)
अमित मरवाहा, तरनतारन (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 01 Sep 2020 01:46 AM IST
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Last rites of Shaheed Naib Subedar Rajwinder Singh in Punjab's Tarn taran
शहीद नायब सूबेदार राजविंदर सिंह और उनका परिवार। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में शहादत का जाम पीने वाले गोइंदवाल साहिब के नायब सूबेदार राजविंदर सिंह एक सितंबर को लगने वाले गुरु श्री अमरदास जी के मेले पर घर आने वाले थे। बेटे के इंतजार में खुशी से घूम रही मां बलविंदर कौर की आंखें बार-बार आंसू बह रहे थे। रविवार को जैसे ही उनकी शहादत की सूचना मिली, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

Last rites of Shaheed Naib Subedar Rajwinder Singh in Punjab's Tarn taran
शहीद का परिवार। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा। राजविंदर के भाई सुखविंदर सिंह की वर्ष 2009 में हादसे में मौत हो गई थी। वह भी फौज में थे। वहीं फौज से ही रिटायर्ड शहीद के पिता जागीर सिंह की दो साल पहले मौत हो गई थी। राजविंदर सिंह सिख लाइट रेजीमेंट में बतौर सिपाही 18 मई 1980 को भर्ती हुए थे। 

Last rites of Shaheed Naib Subedar Rajwinder Singh in Punjab's Tarn taran
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

उनकी पत्नी मनप्रीत कौर को पति की शहादत की खबर तब मिली जब वह बच्चों के साथ टीवी पर खबरें सुन रही थीं। पति की शहादत की खबर सुनते ही वह बेहोश हो गई। उनकी 10 साल की बेटी आकाशजोत मां के मुंह पर पानी के छींटे डालकर बार-बार कह रही थी कि मम्मी तू उठती क्यों नहीं। 70 वर्षीय मां बलविंदर कौर तो एकदम सन्न पड़ गई। 

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Last rites of Shaheed Naib Subedar Rajwinder Singh in Punjab's Tarn taran
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

गांव वईपुई में रहती बहन सर्बजीत कौर ने बताया कि उसका भाई 26 जनवरी को एक माह की छुट्टी काट कर लौटते समय यह कह कर गया था कि शहादत किसी किसी के हिस्से ही होती है। राजविंदर सिंह ने शनिवार शाम चार बजे परिवार से मोबाइल पर बातचीत के दौरान एक सितंबर को गोइंदवाल साहिब में लगने वाले गुरु श्री अमरदास जी के मेले पर घर आने का भरोसा दिया था। वह उनके घर आने की आस लगाए बैठे थे, मगर इससे पहले ही उनकी शहादत की खबर आ गई।

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Last rites of Shaheed Naib Subedar Rajwinder Singh in Punjab's Tarn taran
शहीद के रोते-बिलखते बच्चे। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

बेटे को आर्मी में भर्ती करवाना चाहते थे
राजविंदर सिंह का एक बेटा और दो बेटियां है। बड़ा बेटा जोबनजीत सिंह (16) 11वीं कक्षा में पढ़ता है। उसे राजविंदर आर्मी में भर्ती करवाना चाहते थे। वह जब भी घर आते पिता-बेटा इकट्ठे दौड़ लगाने जाते थे। सेना में भेजने के इरादे से ही राजविंदर बेटे को स्कूल में कराटे का प्रशिक्षण दिलाते थे। बड़ी बेटी पवनदीप कौर (15) और छोटी बेटी आकाशजोत कौर (10) अभी स्कूल में हैं। 

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