पंजाब से ट्रैक्टर-ट्रालियों पर किसान एक बार फिर दिल्ली सीमा को रवाना होने लगे हैं। किसान संगठनों का दावा है कि शुक्रवार को पंजाब से लाखों की संख्या में किसान रवाना हुए हैं। ये किसान अब वापस नहीं लौटेंगे। वह हर हाल में सरकार से लड़कर तीनों कृषि कानून रद्द करवाएंगे। जमीनों के मालिक होकर मजदूर बनना मंजूर नहीं है। दिल्ली में केंद्र सरकार ने खुद माहौल खराब कर किसान आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रची है, जिसे कामयाब नहीं होने देंगे।
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पंजाब के सुनाम से दिल्ली जाते किसान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किसान नेताओं ने कहा कि पंजाब, हरियाणा व यूपी से फिर किसान दिल्ली पहुंच रहे हैं। उधर, फिरोजपुर के ममदोट, लक्खोके बहराम, तरनतारन और सुनाम के अलावा पंजाब के विभिन्न स्थानों से ट्रैक्टर-ट्राली पर किसान दिल्ली रवाना हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन (मानसा) के प्रधान जसविंदर सिंह संधू ने कहा कि शनिवार को लाखों की संख्या में किसान व मजदूर पंजाब से दिल्ली पहुंच रहे हैं। ये किसान सिर पर कफन बांधकर जा रहे हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। संधू ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में जो कुछ हुआ है, उसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है।
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गांव संगतपुरा से किसानों का जत्था दिल्ली को रवाना होता हुआ।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किसान संयुक्त मोर्चा की बैठक गांव दिला राम में हुई। किसान नेताओं ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिस पर सभी के हस्ताक्षर करवाए गए हैं। पांच दिन बाद किसानों का जत्था गांव से रवाना होगा। जिन किसानों के पास ट्रैक्टर-ट्राली है, उनकी बारी कब आएगी, इस संबंध में पर्ची डाली गई। जो किसान अपनी बारी पर दिल्ली नहीं जाएगा, उसे पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, यदि जुर्माना नहीं अदा करेगा तो उसका गांव से बहिष्कार किया जाएगा। सभी ने इस पर सहमति जताई है। शुक्रवार को गांव से किसानों का जत्था दिल्ली रवाना हुआ।
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बख्शी गांव से किसान जत्था दिल्ली जाने की तैयारी करता हुआ।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के नेता गुरविंदर सिंह और राम पाल शर्मा ने कहा कि पंजाब के लोग डरने वाले नहीं हैं। पंजाब से दो दिन के भीतर लाखों की संख्या में दिल्ली के विभिन्न बार्डरों पर किसान पहुंच रहे हैं। सुनाम से शुक्रवार को भी हजारों किसान दिल्ली रवाना हुए हैं। केंद्र सरकार ने दिल्ली बार्डर पर इंटरनेट सेवा बंद कर दी है, ताकि सरकार की असलियत पंजाब के लोगों तक न पहुंच सके। लहरागागा के नजदीकी गांव संगतपुरा से भी किसानों का जत्था दिल्ली को रवाना हुआ।
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किसान आंदोलन की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
कीरती किसान यूनियन के कन्वीनर भूपिंदर सिंह लौंगोवाल ने कहा कि किसानों का मोर्चा बंद नहीं होगा। केंद्र सरकार ने 26 जनवरी को लाल किले पर अपने ही लोगों से सब कुछ करवाया है, ताकि किसान डरकर दिल्ली बार्डर से भाग जाएं। ये सरकार की गलतफहमी है। पंजाब से और ज्यादा लोग दिल्ली रवाना हुए हैं।