इस साल आप कांवड़ लेने जाने की सोच रहे हैं तो यह ख्याल दिल से निकाल दें। चूंकि हरिद्वार की सीमा में प्रवेश करते ही आपको 14 दिन क्वारंटीन रहना होगा। यही नहीं इन 14 दिनों में जो खर्च आएगा वह भी आप से ही वसूला जाएगा। इसके अलावा आदेश न मानने पर कानून कार्रवाई का भी प्रावधान है। यह आदेश उत्तराखंड सरकार और हरिद्वार प्रशासन ने जारी किए हैं। वहीं यमुनानगर जिला प्रशासन को भी अपने सभी बार्डर सील करने को कहा गया है।
कांवड़ यात्रा से पहले पढ़ लें यह नियम, हरिद्वार में घुसे तो 14 दिन होना होगा क्वांरटीन, खर्च भी देना होगा
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यह निर्णय तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए लिया गया है। इसी के चलते इस बार कांवड़ यात्रा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। किसी भी प्रकार की कांवड़ इस बार नहीं लाई जा सकेगी।कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाने व सीमाएं सील करने को लेकर जिला प्रशासन व पुलिस के आला अधिकारियों की बैठक हुई। जिसमें इसे रोकने के लिए रणनीति तैयार की गई। वहीं सभी अधिकारियों को ड्यूटियां सौंपी गई हैं। हरिद्वार प्रशासन की ओर से कहा गया कि जिला प्रशासन किसी को भी कांवड़ यात्रा की अनुमति न दें।
वहीं कोई बिना अनुमति के हरिद्वार आता है तो उसे 14 दिन क्वारंटीन कर दिया जाएगा। भले ही उसमें कोविड-19 के लक्षण न हो। क्वारंटीन के दौरान आने वाला पूरा खर्च भी व्यक्ति से वसूला जाएगा। जिले से करीब बीस हजार से ज्यादा शिवभक्त कांवड़ लेने हरिद्वार जाते हैं। वहीं करीब सात से आठ लाख कांवड़िए जिले से होकर दूसरे राज्यों को जाते हैं। वहीं कुछ विशेष तरह की कांवड़ के लिए प्रशासनिक अनुमति ली जाती है। लेकिन हरिद्वार प्रशासन से हुई बैठक में इस साल किसी को भी कांवड़ के लिए अनुमति न देने पर सहमति बनी है।
नहीं बिकेगी यात्रा संबंधी सामग्री
हरिद्वार प्रशासन की ओर से यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं जिला प्रशासन इसके लिए अलर्ट हो गया है। जिले में किसी भी दुकान पर कांवड़ यात्रा संबंधी सामान नहीं बिकेगा। यात्रा संबंधी कांवड़ियों की वर्दी, बैग बेचने पर पाबंदी लगा दी गई हैं। वहीं इसके लिए डीजे इत्यादि देने वाले पर भी कार्रवाई की जाएगा। ऐसा सभी सामान जब्त कर लिया जाएगा।
सावन छह जुलाई से, पांच को ही सीमाएं होंगी सील
छह जुलाई से सावन की शुरुआत होगी। कांवड़ यात्रा सावन मास में शुरू होती है, जो इसी माह में पड़ने वाली शिवरात्री तक चलती है। शिवरात्री पर गंगा जल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है लेकिन कोरोना के चलते जिला प्रशासन की ओर से यमुनानगर से उत्तर प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड सहित अन्य जिलों से लगती सभी सीमाएं पांच जुलाई को ही बंद कर दी जाएंगी।