नौशेरा सेक्टर में शहीद हुए जवान जसप्रीत सिंह की मां नहीं जानती थी कि दो दिन पहले जिसका कुशलक्षेम पूछा है, उसकी शहादत की खबर आ जाएगी।
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भारतीय जवान जसप्रीत सिंह शहीद
जसप्रीत ने तो मां को फोन पर कहा था कि नेटवर्क की कमी है, इसलिए बात नहीं हो पाती। मेरी चिंता न करियो, इस बार आ नहीं पाऊंगा। इस बार दुश्मनों का खात्मा कर दूं, अगली बार लंबी छुट्टी पर आऊंगा। रोते रोते मां ने यह बात बताई और बेसुध हो गई। होश आता तो कहती, मेरे जिगर का टुकड़ा, छोड़कर चला गया, अब सेहरा किसके सिर बांधूगी।
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भारतीय जवान जसप्रीत सिंह शहीद
कहता था मुझे दो कर्ज उतारने हैं, एक भारत मां का और दूसरा परिवार का। बच्चों की जान तो बचा ली, पर अपनी जान दे दी। बेटे की शहादत पर गर्व है, पर मेरा बच्चा मुझे छोड़कर तो चला गया। यह दर्द पंजाब के मोगा के रहने वाला जसप्रीत सिंह की मां ने बयां किया। जिले के गांव तलवंडी मल्लियां का यह 24 साल का गबरू राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से हुई फायरिंग में घायल हो गया था।
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इंडियन आर्मी की मार से घबराया पाक
- फोटो : PTI
घायल जसप्रीत को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। लेकिन जान देने से पहले इस बहादुर बेटे ने 160 बच्चों की जान बचाई। रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि की और जानकारी जसप्रीत के परिजनों तक पहुंचाई। जैसे ही घर में खबर पहुंची, कोहराम मच गया। जसप्रीत के मां बाप और भाई बहनों का रो रोकर बुरा हाल है।
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सीमा पर तैनात जवान
- फोटो : File Photo
शहीद के पिता स्वर्ण सिंह ने बताया कि जसप्रीत में बचपन से ही देशसेवा करने का जज्बा था। वो कहता था, पिताजी मैं बड़ा होकर सैनिक बनूंगा तथा देश के लिए शहीद होकर गांव व आपका नाम रोशन करूंगा। आज उसने अपनी बात सच करके दिखा दी, लेकिन मुझे अब चिंता है कि मैं परिवार का कर्ज कैसे उतारुंगा। जसप्रीत परिवार का इकलौता सहारा था, वो भी छोड़कर चला गया।