देखिए महाराजा का खास महल, जहां केवल निर्वस्त्र को एंट्री थी
देश विदेश में 'पटियाला पैग' को मशहूर करने वाले पटियाला रियासत के महाराजा भूपिंदर सिंह अपनी रंगीनमिजाजी के लिए काफी मशहूर रहे। इस रंगीनमिजाजी के सच्चे किस्से आपको चौंका देंगे। दरअसल पटियाला महाराज के इन गतिविधियों का जिक्र महाराजा भूपिंदर सिंह के दीवान जरमनी दास ने अपनी किताब 'महाराजा' में किया है।
देखिए महाराजा का खास महल, जहां केवल निर्वस्त्र को एंट्री थी
महाराजा भूपिंदर सिंह ने पटियाला में 'लीला-भवन' या रंगरलियों का महल बनवाया था, जहां केवल निर्वस्त्र लोगों को एंट्री मिलती थी। यह महल पटियाला शहर में भूपेन्दरनगर जाने वाली सड़क पर बाहरदरी बाग़ के करीब बना हआ है। इस महल का जिक्र उनके दीवान ने 'महाराजा' में किया है।
देखिए महाराजा का खास महल, जहां केवल निर्वस्त्र को एंट्री थी
महल का एक खा़स कमरा महाराजा के लिए रिजर्व था। कमरे की दीवारों पर चारों तरफ बने चित्रों में सैकड़ों तरह के आसनों मे प्रेम क्लाप में डूबे औरत-मर्दों को दिखाया गया। कमरे को हिन्दुस्तानी ढंग से सजाया गया है। फर्श परकीमती जवाहरात से जड़े मोटे-मोटे क़ालीन बिछे हैं। महाराजा के भोग-विलास का पूरा साजो सामान मौजूद है।
देखिए महाराजा का खास महल, जहां केवल निर्वस्त्र को एंट्री थी
महाराजा ने महल के बाहर एक 'स्विमिंग पूल' बनवाया। पूल इतना बड़ा कि 150 मर्द-औरतें एक साथ नहा सकें। यहां बड़ी शानदार पार्टियां होती थीं। पार्टियों में खुलेआम रंगरलियां चलती थी। उन पार्टियों में शरीक हाने के लिए महाराजा अपनी प्रेमिकाओं को बुलाते थे। वे सब, महाराजा और उनके दो-चार ख़ास मेहमानों के साथ तालाब में नहाती और तैरती थीं।
देखिए महाराजा का खास महल, जहां केवल निर्वस्त्र को एंट्री थी
पूरा कर्मकांड उनके महल के स्वीमिंग पूल के आसपास होता था। इसमें उनके राज्य के अंग्रेज अधिकारी और उनकी पत्नियां और अन्य अंग्रेज औऱ देसी महिलाएं भी भाग लेती थीं। दीवान जरमनी दास ने महाराजा, महारानी नामक बेस्ट सेलर बुक्स लिखी हैं। उन्होंने इस किताब में खुल कर लिखा है कि इस अवसर पर क्या-क्या होता था।